पीलीभीत: क्यूआर कोड से मिलेगी दवा से जुड़ी हर जानकारी
पीलीभीत ,अमृत विचार। संक्रमण और बीमारी के इस दौर में नकली दवाओं के मामलों में इजाफा देखने को मिला है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से एक ठोस कदम उठाया गया है। सरकार ने अब दवाओं के पत्ते पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य कर दिया है, जिसकी मदद से अब कुछ …
पीलीभीत ,अमृत विचार। संक्रमण और बीमारी के इस दौर में नकली दवाओं के मामलों में इजाफा देखने को मिला है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से एक ठोस कदम उठाया गया है। सरकार ने अब दवाओं के पत्ते पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य कर दिया है, जिसकी मदद से अब कुछ ही सेकंड्स में असली और नकली दवा की पहचान की जा सकेगी। जी हां, अब ग्राहक आसानी से दवा पर मौजूद क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन करके इसके बारे में पता लगा सकेंगे। इस नए फैसले के जरिए नकली दवाओं पर लगाम लगाई जा सकती है।
जिले में ही नहीं बल्कि पूरे देश में नकली दवाओं का कारोबार जोर शोर से चल रहा है। इन दवाओं को बनाने वाले चंद मेडिकल स्वामियों से अपनी सांठगांठ करके अपनी नकली दवाओं को बाजार में बेच रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान भी अधिकतर मेडिकल स्टोरों पर नकली दवाओं की बिक्री की गई थी। इन नकली दवाओं के खाने से मरीजों के लिवर, किडनी समेत तमाम अंगों पर काफी दुष्प्रभाव पड़े थे।
इसको देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने गाइडलाइन जारी करते हुए दवाओं के पत्ते पर क्यूआर कोड लगाने के निर्देश दिए हैं। इस क्यूआर कोड में संबधित दवा की पूरी हिस्ट्री को भी अपलोड करना होगा। करीब 300 से अधिक दवाओं पर क्यूआर कोड लगाने के निर्देश दिए हैं। इस क्यूआर कोड में दवा के बारे में पूरी जानकारी होगी। जैसे- सॉल्ट, बैंच नंबर या कीमत की जानकारी होगी।
मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करने पर मरीज और उनके तीमारदार को दवा की पूरी जानकारी मिल जाएगी। इस नियम को अगले वर्ष 1 जनवरी, 2023 से लागू किए जाने की बात कही जा रही है। इसको लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। एपीआई में क्यूआर कोड लगाने के सरकार के फैसले के बाद अब असली और नकली दवाओं की पहचान आसानी से की जा सकेगी।
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