अयोध्या: गेहूं खरीद की डेडलाइन पूरी, सरकार की चाहत अधूरी
अमृत विचार, अयोध्या। गेहूं खरीद की डेडलाइन 15 जून को समाप्त हो रही है, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार लक्ष्य की अपेक्षा जनपद में बहुत ही कम गेहूं की खरीद हुई है। 54 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन मंगलवार तक 1173 किसानों से महज 3426.66 …
अमृत विचार, अयोध्या। गेहूं खरीद की डेडलाइन 15 जून को समाप्त हो रही है, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार लक्ष्य की अपेक्षा जनपद में बहुत ही कम गेहूं की खरीद हुई है। 54 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन मंगलवार तक 1173 किसानों से महज 3426.66 मीट्रिक टन ही गेहूं खरीदा जा सका है, जो कि ऊंट के मुंह में जीरा के समान है।
सरकार ने 1 मई से गेहूं की खरीद शुरू की थी। जनपद के 11 ब्लॉक में 57 केंद्रों पर खरीद शुरू हुई। शुरू के 15 दिन तो कई केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ था। इसके बाद इक्का-दुक्का किसान पहुंचे, लेकिन वह भी प्रशासन का पेट नहीं भर पाए। किसानों ने इस बार सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचना उचित नहीं समझा और आढ़तियों को अच्छे रेट पर दे दिए।
अमृत विचार की टीम ने गोसाईगंज स्थित राजकीय गेंहू क्रय केंद्र नवीन सब्जी मंडी का निरीक्षण किया तो पाया कि केंद्र पर सन्नाटा पसरा हुआ था। यहां केंद्र प्रभारी हरिसेवक चौरसिया अपने दलबल के साथ मौजूद थे, लेकिन किसानों का अता पता नहीं था। खाद्य व विपरण विभाग के डिप्टी आरएमओ अजीत कुमार ने बताया कि गोसाईंगंज व पूराबाजार के क्रय केंद्रों पर अच्छी खरीद हुई है।
बाकी के केंद्रों पर भी किसानों ने गेहूं बेचा है। उन्होंने बताया कि 2021 में गेहूं खरीद का कोई लक्ष्य नहीं रखा गया था फिर भी 54 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी। 2020 में भी 54 हजार के सापेक्ष 50 हजार मीट्रिक टन गेहूं कि खरीद हुई थी। इस बार गेहूं 6.35 प्रतिशत ही गेहूं खरीदा गया।
1060 किसानों को 6.39 करोड़ का भुगतान
अजीत कुमार ने बताया कि अब तक 92 प्रतिशत किसानों को भुगतान किया जा चुका है। जनपद के 1060 किसानों को 6 करोड़ 39 लाख 75 हजार का भुगतान उनके अकाउंट में किया गया है। उन्होंने बताया कि जो किसान बचे हैं उनका भी जल्द ही भुगतान करा दिया जाएगा।
इस कारण किसान सरकारी केंद्रों से छिटके
दरअसल इस बार किसानों को आढ़ती गेहूं का अच्छा मूल्य दे रहे थे, जबकि सरकारी केंद्रों पर एमएसपी 2015 रुपये ही है। आढ़ती किसानों को एक क्विंटल गेहूं का 2200 रुपये तक दे रहे थे। इसके अलावा किसानों को उतराई और छनवाई के भी प्रति क्विंटल 20 रुपये देने पड़ते थे। इस कारण किसानों ने सरकारी केंद्रों से कन्नी काट ली।
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