प्राणायाम से होता है जीवनी शक्ति का विस्तार: योगाचार्य प्रमोद

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

गोरखपुर। प्राणायाम प्राण वायु की साधना है। महर्षि पतंजलि ने प्राणायाम को अष्टांग योग में चौथे स्थान पर रखा है क्योंकि प्रारंभिक तीन अंग यम, नियम और आसन के बिना सीधे प्राणायाम करना उपयुक्त नहीं होता है। यम और नियम से शरीर और मन की शुद्धि करके स्थिर आसन में प्राणायाम का अभ्यास करने से …

गोरखपुर। प्राणायाम प्राण वायु की साधना है। महर्षि पतंजलि ने प्राणायाम को अष्टांग योग में चौथे स्थान पर रखा है क्योंकि प्रारंभिक तीन अंग यम, नियम और आसन के बिना सीधे प्राणायाम करना उपयुक्त नहीं होता है। यम और नियम से शरीर और मन की शुद्धि करके स्थिर आसन में प्राणायाम का अभ्यास करने से साधक की जीवनी शक्ति का विस्तार होता है।

उक्त बातें गोरखनाथ मंदिर में आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित साप्ताहिक योग शिविर एवं शैक्षिक कार्यशाला के चतुर्थ दिवस के सैद्धान्तिक सत्र में प्राणायाम विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में योग प्रशिक्षकों को संबोधित करते हुए योगाचार्य प्रमोद कुमार यादव ने कही।

उन्होंने आगे यह भी कहा कि प्राणायाम में सामान्य श्वास प्रश्वास प्रक्रिया से इतर यदि साधक कुंभक लगाता है तभी प्राणायाम का संपूर्ण फल मिलता है। योगाचार्य ने कहा कि महायोगी गुरु गोरखनाथ का हठयोग प्राणायाम की उत्कृष्ट साधना है। महर्षि पतंजलि ने प्राणायाम के चार प्रकार बताए है तथा उनके लिए आधारों का भी वर्णन किया है।

उन्होंने हठयोग पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया कि पतंजलि ने जिसको अनुलोम-विलोम बताया है उसी को गुरु गोरखनाथ जी ने हठयोग की संज्ञा दी है। गुरु गोरखनाथ के हठयोग का प्रभाव गुरु नानक देव पर इस प्रकार पढ़ा था कि उनके सिख पन्थ के गुरुद्वारे में अजपा जप की महिमा का कीर्तन आज भी गाया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि हमारे शरीर में पांच प्रकार के प्राणवायु विद्यमान होते हैं। उन सभी प्राणवायु को अपने अपने स्थान पर सुनियोजित व संयमित करने के लिए प्राणायाम क्रिया की परम आवश्यकता है।

संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे श्री गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ के साहित्य विभाग के अध्यक्ष डॉ॰ रोहित कुमार मिश्र ने कहा कि प्राणायाम की क्रिया शरीर में दिव्यता का संचार करती है। इस क्रिया से न केवल शरीर निरोग होता है अपितु साधक की आयु का भी विस्तार होता है। संगोष्ठी का संचालन व विषय की प्रास्ताविकी गुरु गोरखनाथ योग संस्थान के योगाचार्य योगी सोमनाथ ने किया तथा सभी आगन्तुकों का धन्यवाद ज्ञापन नित्यानंद तिवारी ने किया।

पढ़ें-दिवाली पर घर लाएं लक्ष्मी कमल और मनी प्लांट, लाएगा सुख समृद्धि

संबंधित समाचार