मुरादाबाद : न्यायपीठ के सामने पेश होगी फौजी की नाबालिग बेटी

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मुरादाबाद,अमृत विचार। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सीधी दखल के बाद फौजी की नाबालिग बेटी के पुनर्वासन का मामला दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। मुरादाबाद बाल कल्याण समिति ने नाबालिग को पुलिस अभिरक्षा में 25 जून को न्यायपीठ के समक्ष पेश करने की तिथि तय की है। सीडब्ल्यूसी ने इसका पत्र एसएसपी के साथ …

मुरादाबाद,अमृत विचार। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सीधी दखल के बाद फौजी की नाबालिग बेटी के पुनर्वासन का मामला दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। मुरादाबाद बाल कल्याण समिति ने नाबालिग को पुलिस अभिरक्षा में 25 जून को न्यायपीठ के समक्ष पेश करने की तिथि तय की है। सीडब्ल्यूसी ने इसका पत्र एसएसपी के साथ ही मझोला पुलिस को भी भेजा है।

मझोला के एक फौजी की पत्नी ने 15 दिन पहले बाल कल्याण समिति के सामने 14 वर्षीय बेटी का पुनर्वासन सुनिश्चित करने की मांग की थी। बताया था कि उसकी बड़ी बेटी को जबरन अमरोहा के गजरौला में रहने वाले बड़े बहन-बहनोई ने हथिया लिया है। मानसिक व शारीरिक यातना की शिकार नाबालिग बेटी चाहकर भी मां-बाप के पास नहीं आ पा रही। प्रकरण में नाटकीय मोड़ तब आया, जब अमरोहा सीडब्ल्यूसी अचानक कूदी। मुरादाबाद बाल कल्याण समिति के नोटिस जारी कर सीडब्ल्यूसी अमरोहा मनमानी करने पर उतारू हो गई। यह पक्षी कार्यवाही कर अमरोहा की न्यायपीठ ने नाबालिग को न सिर्फ परित्यक्ता करार दिया, बल्कि अस्थाई सुपुर्दगी भी तत्काल सुनिश्चित कर दी।

आयोग ने लिया स्वत: संज्ञान:
संवेदनशील मामले में अमरोहा बाल कल्याण समिति के खेल ने उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भी हक्का-बक्का कर दिया। मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए आयोग ने अमरोहा बाल कल्याण समिति के आदेश को जेजे एक्ट का उल्लंघन माना। डीएम को पत्र लिखकर आयोग ने न सिर्फ सीडब्ल्यूसी अमरोहा को भंग करने की संस्तुति की, बल्कि नाबालिग को उसके जैविक मां-बाप को सुपुर्द करने का भी आदेश दिया। इस क्रम में मुरादाबाद की बाल कल्याण समिति ने एसएसपी को पत्र लिखा। प्रकरण की संवेदनशीलता से पुलिस के उच्चाधिकारी को अवगत कराते हुए मझोला पुलिस की अभिरक्षा में किशोरी को न्यायपीठ के समक्ष पेश करने को कहा। बाल कल्याण समिति के सदस्य हरिमोहन गुप्ता ने बताया कि 25 जून को नाबालिग की पेशी की तिथि तय की गई है। नाबालिग की काउंसलिंग के बाद ही उसके पुनर्वासन से संबंधित निर्णय लिया जाएगा।

तो दो लाख रुपये ने बदल दिया न्यायपीठ का ईमान!
बाल कल्याण समिति अमरोहा की कार गुजारी आम होने के बाद हर कोई यह जानने में जुटा है कि न्यायपीठ ने आखिरकार जेजे एक्ट का उल्लंघन क्यों किया ? वह कौन सी परिस्थिति रही, जिसमें मां-बाप कि बगैर काउंसलिंग के उनकी बेटी को परित्यक्ता घोषित किया गया ? एक फौजी को दर-दर भटकने पर न्यायपीठ ने क्यों मजबूर किया? इन सवालों का सही जवाब तो अमरोहा न्यायपीठ के पास है, लेकिन पर्दे के पीछे चल रही कानाफूसी बाल कल्याण समिति अमरोहा के दामन पर दाग लगा रही है।

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