मुरादाबाद: चाकू-तमंचे चलाने वाले हाथ चलाएंगे की बोर्ड-माउस

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शीशपाल सिंह, अमृत विचार। लूट, डकैती और हत्या जैसे जघन्य अपराधाें में जेल की सलाखों के पीछे रहने वाले बंदियों को भी रोजगार के अवसर मुहैया कराए जाएंगे। इसके लिए कवायद शुरू कर दी गई है। बंदियों को जल्द ही रोजगार परक शिक्षा दी जाएगी। 300 घंटे के प्रशिक्षण के बाद चाकू और तमंचे चलाने …

शीशपाल सिंह, अमृत विचार। लूट, डकैती और हत्या जैसे जघन्य अपराधाें में जेल की सलाखों के पीछे रहने वाले बंदियों को भी रोजगार के अवसर मुहैया कराए जाएंगे। इसके लिए कवायद शुरू कर दी गई है। बंदियों को जल्द ही रोजगार परक शिक्षा दी जाएगी। 300 घंटे के प्रशिक्षण के बाद चाकू और तमंचे चलाने वाले हाथ की-बोर्ड, माउस, ब्रुश और नक्काशी करते हुए दिखाई देंगे।

  • 80 बंदियों को दिया जाएगा कंप्यूटर हार्डवेयर, जैविक खाद, नक्काशी और पेंटिंग का प्रशिक्षण
  • 04 बैच में दिया जाएगा 300 घंटे का प्रशिक्षण, बंदियों की सोच बदलने के साथ ही बदलेगा जेल का माहौल

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को आए कारागार मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों के कल्याण व पुनर्वास के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाने का आदेश कारागार प्रशासन को दिया था। इसके साथ ही उन्होंने बंदियों के लिए रोजगार परक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने का भी निर्देश दिया था। उनका कहना था कि इससे बंदियों की नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में बदला जा सकेगा। बंदियों की सोच बदलेगी तो जेल का माहौल भी बदलेगा। जेल से निकलने के बाद बंदी यहां मिले प्रशिक्षण के बल पर स्वरोजगार अथवा नौकरी भी पा सकेंगे।

वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि कारागार मंत्री के निर्देश पर बंदियों को प्रशिक्षण के लिए कौशल विकास केंद्र से बात कर ली गई है। प्रशिक्षण के लिए 80 बंदी तैयार हो गए हैं। इन्हें चार बैच में 300 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बंदियों को कंप्यूटर हार्डवेयर, जैविक खाद बनाने, धातु की नक्काशी व कलरिंग तथा पेंटिंग में पारंगत किया जाएगा।

प्रशिक्षण लेने वाले बंदियों को कौशल विकास केंद्र की ओर से सर्टिफिकेट मिलेगा। उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादनों को बचने के लिए जेल के बाहर बिक्री केंद्र भी बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि जेल में मिले प्रशिक्षण का प्रयोग बंदी जमानत पर छूटने के बाद कर सकते हैं। वह इससे नौकरी पा सकते हैं। प्रशिक्षण लेने वाले बंदियों को स्वरोजगार के लिए लोन दिलाने में भी सरकार की ओर से मदद की जाएगी।

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