मुरादाबाद: जिस दिन से चला हूं मंजिल पे नजर है…
मुरादाबाद, अमृत विचार। जिस दिन से चला हूं मंजिल पे नजर है, आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा। मशहूर शायर बशीर बद्र की यह लाइनें शहर में दस्तकारी की जमानत दिलशाद हुसैन के संकल्पों पर सटीक बैठतीं हैं। दिलशाद अब छैनी-हथौड़ी से पीतल के सीने पर शिल्पकारी का कोई नया तराना नहीं छेड़ेंगे, …
मुरादाबाद, अमृत विचार। जिस दिन से चला हूं मंजिल पे नजर है, आंखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा। मशहूर शायर बशीर बद्र की यह लाइनें शहर में दस्तकारी की जमानत दिलशाद हुसैन के संकल्पों पर सटीक बैठतीं हैं। दिलशाद अब छैनी-हथौड़ी से पीतल के सीने पर शिल्पकारी का कोई नया तराना नहीं छेड़ेंगे, बल्कि पद्मश्री के दावेदारों में अपनी हाजिरी लगाएंगे।

- अब पद्मश्री के दावेदारों में अपनी हाजिरी लगाएंगे शिल्पकार दिलशाद
- बहुत जल्द राष्ट्रपति भगवन जाकर शिल्प गुरु का अवार्ड ग्रहण करेंगे
दस्तकारी और शिल्पकारी का अफसाना लिखने वाले दिलशाद को यह काम विरासत में मिला है। दिलशाद ने जिंदगी के 70 बसंत गुजार दी है। लेकिन, अब भी इन्हें अपने दादा अब्दुल हमीद के हुनर पर नाज है। कहते हैं कि चाचा अंसार ने मुझे तराशा। लेकिन, असल उस्ताद दादा ही थे, जिनकी शार्गिदगी ने देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलने का मौका दिलाया।
दिलशाद हुसैन कहते हैं कि शिल्पकारी में मुझे अब हुनरमंदी का कोई नया तराना नहीं छोड़ना है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा मुझे शिल्प गुरू का अवार्ड मिल चुका है। अब इसके मेडल मिलने वाले हैं। यह अवार्ड महिलाओं को दस्तकारी के प्रशिक्षण देने के लिए मिला है। हमने 25 महिलाओं को इस कार्य में प्रशिक्षण दिया है। जबकि प्रशिक्षण केंद्र के जरिए चार से पांच सौ लोगों को टेंड कर चुके हैं। जल्द मुझे राष्ट्रपति भवन से बुलावा आयेगा। अब उस अवार्ड का प्रमाण पत्र स्वर्णजड़ित मेडल और अंग वस्त्र मिलना है।
बताते हैं कि 70 वर्षों की उम्र में हमने दस्तकारी और हुनरमंदी का जो इतिहास रचा है, उसके अनगिनत प्रमाण पत्र मुझे हासिल हुए हैं। मीडिया ने भी मुझे हौसला दिया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमारा हौसला बढ़ा चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पांच बार मुझे मिले हैं। कहते हैं कि तीन जून को जब प्रधानमंत्री मेरे स्टाल पर आए तब मुझे इसका अंदाजा नहीं था कि मेरी कलाकृतियां जर्मनी तक पहुंच जाएगी। सरकार की सराहना के आधार और राजनीतिक संपर्कों ने मुझे यह सलाह दी है कि मैं पद्मश्री अवार्ड के लिए अपना दावा करूं।
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