रामपुर: निजी अस्पताल में ढाई माह की बच्ची की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
रामपुर/बिलासपुर, अमृत विचार। रामपुर रोड स्थित एक प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने हंगामा किया। साथ ही उनकी ढाई माह की बेटी की जिंदगी छीनने का भी गंभीर आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने मामले को शांत कराया। बिलासपुर नगर के मोहल्ला एसडीएम कोर्ट के …
रामपुर/बिलासपुर, अमृत विचार। रामपुर रोड स्थित एक प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने हंगामा किया। साथ ही उनकी ढाई माह की बेटी की जिंदगी छीनने का भी गंभीर आरोप लगाया। हंगामे की सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने मामले को शांत कराया।
बिलासपुर नगर के मोहल्ला एसडीएम कोर्ट के पीछे शिव कालोनी का रहने वाला राहुल नगर के केमरी तिराहें पर समोसे-पकौड़ी का ठेला लगाता है। राहुल के मुताबिक वह दो-तीन दिन पहले दिल्ली अपने भाई के पास गया था। गुरुवार को उसकी ढ़ाई माह की पुत्री पीहू को अचानक ठंड लगने के बाद सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। तभी उसकी पत्नी रेखा और बड़ा भाई रमेश पुत्री को लेकर नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। अस्पताल के चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए कहीं और के लिए रेफर कर दिया।
इसी बीच दोपहर एक बजे उसकी पत्नी बच्ची को लेकर रामपुर रोड स्थित छाबड़ा हॉस्पिटल लेकर पहुंची। बच्ची को भर्ती कराया गया। दिल्ली से शुक्रवार सुबह अस्पताल पहुंचें राहुल ने बताया कि सवेरे आठ बजे तक उसकी बच्ची का स्वास्थ्य ठीक था। इतने में अस्पताल के डॉक्टर बच्ची को बेहतर उपचार के लिए उत्तराखंड के हल्द्धानी स्थित सुशीला तिवारी हॉस्पिटल के लिए रेफर करने लगे।
राहुल के मुताबिक वह बच्ची को छोड़ वह कुछ ही देर के लिए घर गया। और वापस लौटा तो,उसकी बेटी की मौत हो चुकी थी। राहुल के साथ-साथ उसकी पत्नी रेखा,भाई रमेश का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में घुसकर बच्ची को देखने से मनाकर दिया।
इतने में परिवार के लोग अस्पताल के गेट पर इकट्ठा हो गए। अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। सूचना पर पहुंचे दलबल के साथ कोतवाल संजय प्रताप सिंह ने हंगामा कर रहे परिजनों को शांत कराया। अस्पताल स्टाफ की और से पुलिस को परिजनों की रजामंदी से बनवाए गए बीएचपी पर अंगूठा लगवाया गया था। परिजनों का यह भी आरोप है कि अस्पताल ने खुद ही यह तैयार किया और वह अनपढ़ है,जानकारी नही दी गई थी।मामले को लेकर जब उप-जिलाधिकारी मयंक गोस्वामी से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो,उनका फोन रसीव नही हो सका।
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