मुरादाबाद : फौजी की अंतिम सासें गिन रहीं बेटी पाने की उम्मीद

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मुरादाबाद, अमृत विचार। सिस्टम के मकड़जाल में फंसे एक फौजी की उम्मीदें अंतिम सांस गिन रही हैं। लाचार पिता बेटी को दोबारा पाने की लालसा में जिम्मेदारों की परिक्रमा कर थक चुका है। पूरा सरकारी सिस्टम कागज की कस्ती बना फौजी की उम्मीदों की नाव पार लगाने में जुटा है। सिस्टम के अप्रत्याशित खेल से …

मुरादाबाद, अमृत विचार। सिस्टम के मकड़जाल में फंसे एक फौजी की उम्मीदें अंतिम सांस गिन रही हैं। लाचार पिता बेटी को दोबारा पाने की लालसा में जिम्मेदारों की परिक्रमा कर थक चुका है। पूरा सरकारी सिस्टम कागज की कस्ती बना फौजी की उम्मीदों की नाव पार लगाने में जुटा है। सिस्टम के अप्रत्याशित खेल से हताश फौजी की आखिरी उम्मीद बाल अधिकार संरक्षण आयोग है।

देखना दिलचस्प होगा कि बाल कल्याण समिति मुरादाबाद के आदेशों को दरकिनार कर चुका प्रशासनिक अमला बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष के पत्र को कितना तवज्जो देता है। सिस्टम ने फौजी का साथ दिया तो नाबालिग बेटी को पिता से मिलने से कोई रोक नहीं सकेगा। मझोला के एक फौजी की पत्नी बाल कल्याण समिति के दरवाजे पर पहुंची। महिला ने बड़ी बहन पर बड़ी बेटी को हथियाने का आरोप मढ़ा। महिला ने कानूनी आधार पर पुत्री की सुपुर्दगी की मांग की। बाल कल्याण समिति ने आरोपी दंपती को पहले नौ, फिर 15 और अंत में 25 जून को तलब किया। तीनों तिथि पर आरोपी दंपती न्यायपीठ के समक्ष नहीं पहुंचे। प्रकरण में अमरोहा सीडब्ल्यूसी कूद पड़ी। न्यायपीठ ने नाबालिग को मां-बाप से परित्यक्ता घोषित कर उसकी सुपुर्दगी मौसा-मौसी के हाथ में कर दी। कागजात की हेराफेरी व अमरोहा सीडब्ल्यूसी के गैरकानूनी दखल को उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीरता से लिया।

नाबालिग की सुपुर्दगी जैविक मां-बाप को करने की संस्तुति की
सदस्य शुचिता चतुर्वेदी ने नाबालिग बेटी उसके जैविक मां-बाप के सुपुर्द करने का आदेश दिया। संबंधित पत्र की प्रति डीएम अमरोहा को भेजा गया। उधर, बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा ने भी डीएम मुरादाबाद को पत्र लिखा। नाबालिग की सुपुर्दगी उसके जैविक मां-बाप को करने की संस्तुति की। दिलचस्प बात यह है बाल अधिकार संरक्षण आयोग व बाल कल्याण समिति मुरादाबाद के फौजी के पक्ष में होने के बाद भी उनके द्वारा की गई कानूनी कार्रवाई का धरातल पर असर नहीं है। प्रशासनिक अमला व स्थानीय पुलिस पूरे प्रकरण से पल्ला झाड़ कर बैठे हैं। नाबालिग की सुपुर्दगी फौजी के पक्ष में करने में किसी की रुचि नहीं। ऐसे में फौजी सिस्टम के मकड़जाल में उलझ कर रह गया है। बेटी को दोबारा पाने की उसकी आस अंतिम सांसें गिन रही हैं।

मुख्यमंत्री पोर्टल पर गुमराह कर रहे जिम्मेदार
नाबालिग बेटी को दोबारा पाने की उम्मीद में पीड़ित फौजी ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी गुहार लगाई। मामले की जांच डीपीओ मुरादाबाद को सौंपी गई। प्रकरण में बाल कल्याण समिति की भूमिका महत्वपूर्ण बताते हुए डीपीओ ने कार्रवाई का निर्देश देने का दावा किया। निर्देशों की प्रगति के बाबत कोई आख्या डीपीओ ने नहीं ली। उधर, विषहीन बताई जा रहे बाल अधिकार संरक्षण आयोग व बाल कल्याण समिति के सदस्य भी प्रकरण में प्रशासनिक चुप्पी से सकते में हैं। उधर, फौजी ने भी सिस्टम में शामिल सभी कड़ियों की कार्यप्रणाली को सवालों के कटघरे में खड़ा किया है। फौजी ने दो टूक कहा कि सीएम पोर्टल पर गलत सूचनाएं दर्ज कराकर जिम्मेदार शासन को गुमराह कर रहे हैं।

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