अमृत विचार अभियान : बच्चों के लिए बड़ा खतरा बने हाईवे किनारे चल रहे विद्यालय

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मुरादाबाद,अमृत विचार। हाईवे किनारे चल रहे निजी स्कूल बच्चों के लिए खतरा बन रहे हैं। स्कूलों की छुट्टी के समय हाइवे पर जाम लग जाता है। इस दौरान भारी वाहनों से हादसे का अंदेशा बना रहता है। लेकिन, जिम्मेदार समस्या से बेखर हैं। मुरादाबाद-हरिद्वार हाइवे पर कई स्कूल नियमों की अनदेखी कर संचालित किए जा …

मुरादाबाद,अमृत विचार। हाईवे किनारे चल रहे निजी स्कूल बच्चों के लिए खतरा बन रहे हैं। स्कूलों की छुट्टी के समय हाइवे पर जाम लग जाता है। इस दौरान भारी वाहनों से हादसे का अंदेशा बना रहता है। लेकिन, जिम्मेदार समस्या से बेखर हैं। मुरादाबाद-हरिद्वार हाइवे पर कई स्कूल नियमों की अनदेखी कर संचालित किए जा रहे हैं। कांठ रोड पर एसएस चिल्ड्रन अकेडमी, नोसगे स्कूल, पुलिस मॉर्डन स्कूल, रानी प्रीतम स्कूल हैं। इनमें से एसएस चिल्ड्रेन अकेडमी और रानी प्रीतम स्कूल का गेट सीधा हाइवे पर ही खुलता है। कांठ रोड पर 24 घंटे भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में बच्चों को सड़क पार कर स्कूल जाना पड़ता है। इससे कभी भी दुर्घटना घट सकती है। स्कूल प्रबंधन या स्टाफ इस मामले को लेकर गंभीर नजर नहीं आता, जबकि हाईवे को पार करते समय कई ग्रामीण जान गवां चुके हैं। इन हादसों से भी स्कूल संचालक सबक नहीं ले रहे हैं।

40 मीटर तक निर्माण पर सख्ती, इसके बाद इजाजत लेनी होगी 
राजमार्गों के किनारे निर्माण पर कंट्रोल लाइन (हद) और बिल्डिंग लाइन की हदबंदी को नए सिरे से तय किया गया है। नए नियमों के मुताबिक, हाइवे के मध्य से दोनों ओर 75-75 मीटर दायरे में कोई निर्माण नहीं होगा। निर्माण बेहद जरूरी है तो एनएचएआई तथा राजमार्ग मंत्रालय से अनुमति लेनी होगी। राष्ट्रीय राजमार्ग नियंत्रण एक्ट की धारा 42 के तहत नई व्यवस्था में स्पष्ट है कि हाइवे के मध्य से 40 मीटर तक निर्माण की इजाजत कतई नहीं मिलेगी। 40 से 75 मीटर के दायरे में निर्माण बहुत जरूरी है तो भू-स्वामी को एनएचएआई से अनुमति लेनी होगी। एनएचएआई की सिफारिश पर राजमार्ग मंत्रालय अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करेगा। राजमार्ग मंत्रालय की एनओसी के बाद ही संबंधित विकास प्राधिकरण अथवा जिला पंचायत नक्शा पास करेगा।

यह हैं नियम
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने देश के समस्त राजमार्गों के किनारे किसी भी तरह के निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब राजमार्गों के मध्य से 75 मीटर की चौड़ाई तक निर्माण कराने के लिए संबंधित विकास प्राधिकरण अथवा जिला पंचायत के साथ-साथ एनएचएआई और राजमार्ग मंत्रालय से अनिवार्य रूप से इजाजत लेनी होगी। ऐसा नहीं करने पर निर्माण को ध्वस्त कर दिया जाएगा। नया आदेश सिर्फ नवनिर्माण पर नहीं, बल्कि पुराने निर्माण में तब्दीली कराने अथवा जीर्णोद्धार कराने पर भी लागू होगा।

व्यावसायिक गतिविधियों के लिए वसूला जाएगा टैक्स
एनएचएआई द्वारा नेशनल हाईवे के किनारे कॉमर्शियल गतिविधियों पर लाइसेंस शुल्क वसूला जाएगा। एनएचएआई की टीम द्वारा हाईवे किनारे पेट्रोल पंप, स्कूल-कॉलेज, ढाबा और शोरूम की सूची तैयार की जाएगी।

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