बरेली: लड़कियों की तरह जीना हुआ मुहाल, कुत्ते संग सड़क किनारे मासूम बेटे को छोड़ गए बेहाल

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। “किसी ने सच ही कहा है, ईश्वर की बनाई हुई एक शख्सियत हूं मैं, थोड़ा अलग हूं पर रखती अहमियत हूं मैं।” मेरे मम्मी पापा कहते हैं कि तू किन्नर है, निकल जा घर से। बताइए मैं क्या करूं? मैंने इंटरनेट पर देखा था कि मुझे कोई बीमारी है, लड़कियों की फ्रॉक …

बरेली, अमृत विचार। “किसी ने सच ही कहा है, ईश्वर की बनाई हुई एक शख्सियत हूं मैं, थोड़ा अलग हूं पर रखती अहमियत हूं मैं।”
मेरे मम्मी पापा कहते हैं कि तू किन्नर है, निकल जा घर से। बताइए मैं क्या करूं? मैंने इंटरनेट पर देखा था कि मुझे कोई बीमारी है, लड़कियों की फ्रॉक पहनने की, लड़कियों की तरह रहने की। मैं कुछ नहीं कर सकती। मेरे घरवाले मुझे रोजाना मारते पीटते रहते हैं। मेरे मां-बाप के मुझे मिलकर 5 बच्चे हैं। मुझे कुछ याद नहीं। मुझे मेरे पापा बाइक में बैठाकर मेरे पालतू कुत्ते के साथ यहां नदी किनारे सड़क पर अकेला छोड़ गए। मेरे सिर पर नारियल का गोला उतारा और मेरे पैर में चोट भी है, अंकल और मुझे कुछ नहीं याद आ रहा, मेरे पापा गाड़ियों के पंक्चर बनाते हैं और मुझे कुछ नहीं याद आ रहा।

ये शब्द हैं, अपने पालतू कुत्ते के संग रोते बिलखते सड़क पर पड़े करीब 11 साल के उस मासूम के, जो बता रहा है कि उसके मां-बाप ने जन्म तो उसे लड़के के रूप में दिया, लेकिन कुदरती रूप से वह लड़की है। उसकी सारी हरकतें, रहन-सहन, हाव-भाव, पहनावा समेत हर वो बात जो लड़कियों में होती है, जो लड़कियां करती हैं, उसे भी पसंद है। लेकिन, समाज तो दूर उसके खुद के माता पिता उसकी इस बात से नफरत करते हैं। नफरत का आलम भी ऐसा कि अपने ही खून को बेघर छोड़ दिया।

कहते हैं फिल्में समाज का आइना होती हैं। आपको याद होगा, कुछ समय पहले ही बॉलीवुड की एक मूवी आई थी, जिसका नाम था ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’। दरअसल, इस मूवी में अभिनेत्री वाणी कपूर ने एक किन्नर (उभयलिंगी) का रोल निभाया था। जिसके बाद से ही उसे सब ऐसे नजरों से देखते हैं कि मानों वो इस दुनिया में रहने के काबिल ही नहीं, ये समाज उसके लिए है ही नहीं।

हम शायद इस दर्द का अनुभव न कर पाएं। लेकिन, मासूम बच्चे की आंसुओं से भरी आंखें, कंपकंपाते होंठ, लड़खड़ाती जुबान, बेसुख दिमाग, तेज दौड़ती धडकनें मौन रहकर भी चीख रही हैं। मानों, वो कहना चाहती हों कि मां आपने ही तो नौ महीने अपनी कोख में रखकर मुझे जन्म दिया। पापा … आप ही का तो मैं खून हों। फिर मुझसे इतनी नफरत क्यों। क्या दोष है मेरा? क्या गलती है मेरी? क्या इतना बुरा हूं मैं, मां।

दरअसल, ये पूरा वाक्या मंगलवार की सुबह हुआ। लेकिन, बच्चे को क्या पता था कि उसके लिए ये मंगलवार उसके ही मां-बाप अमंगलकारी कर देंगे। थर्ड जेंडर का बच्चा होने के शक में यूपी के बरेली जनपद के एक मां-बाप अपने बेटे को रामगंगा पुल पर पालतू कुत्ते संग छोड़कर फरार हो गए। गनीमत रही कि अर्धबेहोशी की हालत में पुल पर बच्चा पुलिस को मिल गया। जिसके बाद उसे पुलिस ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जांच पड़ताल में पुलिस को पता चला कि थर्ड जेंडर का बच्चा होने पर उसके माता-पिता उसे छोड़कर फरार हो गए। फिलहाल पुलिस अभी इस पूरे मामले की जांच कर रही है। बच्चा अभी कुछ भी ज्यादा बता पाने की हालत में नहीं है।

पुलिस का कहना है कि मंगलवार सुबह रामगंगा पुलिस चौकी पर तैनात चीता मोबाइल को सूचना मिली कि एक बच्चा पुल पर अर्धबेहोशी की हालत में है। मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे जिला अस्पलात में उपचार के लिए भर्ती कराकर जांच पड़ताल शुरु कर दी और इस बाबत चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को भी सूचित कर दिया है।

रामगंगा चौकी प्रभारी अवधेश कुमार ने बताया कि बच्चा भोजीपुरा के अटामांडा गांव (भैरपुरा) का रहने वाला है। उसने अपना नाम विक्की बताया है। जबकि पूछताछ में उसने बताया कि उसके पिता ने दो शादी की है। उसके पिता का नाम शिवम उर्फ़ मोहम्मद अली खान है। उसके पिता का तलाक हो गया है। उसकी पहली मां का नाम मधु था। इसके बाद उसके पिता ने शबनम नाम की महिला से शादी कर ली और अपना नाम शिवम उर्फ़ मो. अली खान रख लिया।

पुलिस को पूछताछ में यह भी पता चला है कि बच्चे के पिता ने दो शादी की है। दूसरी मां उसे पसंद नहीं करती है। वह उसे हमेशा दूर रहने को कहती है, मारती-पीटती है। इसके साथ ही पिता पर भी उसे घर से निकालने का दबाब बनाती है। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच पड़ताल में जुटी हुई है।

ये भी पढ़ें : बरेली: पालतू कुत्ते संग बच्चे को सड़क पर रोता बिलखता छोड़ गए मां-बाप, कारण जानकार हो जाएंगे हैरान

संबंधित समाचार