सीतापुर: 38 के स्थान पर 14 डॉक्टरों के सहारे जिला अस्पताल, सीएमएस बोले- शासन को कराया गया है अवगत
सीतापुर। पचास लाख की आबादी वाले जिले में जिला अस्पताल की हालत तबादलों की वजह से खासी बिगड़ गई है। 38 डॉक्टरों वाले अस्पताल में 14 चिकित्सक ही सेवा दे पा रहे हैं। ऐसे में मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि चिकित्सकों …
सीतापुर। पचास लाख की आबादी वाले जिले में जिला अस्पताल की हालत तबादलों की वजह से खासी बिगड़ गई है। 38 डॉक्टरों वाले अस्पताल में 14 चिकित्सक ही सेवा दे पा रहे हैं। ऐसे में मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि चिकित्सकों की कमीं पहले से थी, लेकिन स्थानांतरण के कारण और बढ़ गई है। ऐसे में शासन को अवगत कराया गया है।
मंगलवार सुबह दस बजे तक जिला अस्पताल में 2200 मरीजों के लिए पर्चा काउण्टर पर पर्चे बन चुके थे। ओपीडी में सबसे अधिक भीड़ थी। फिजीशियन और सर्जन कक्ष के बाहर भीड़ थी, लेकिन चिकित्सक कक्ष में मौजूद नहीं थे। यही हाल चर्म रोग विशेषज्ञ कक्ष का था। यहां भी भीड़ को चिकित्सक ढूंढे नहीं मिल रहे थे। ओपीडी में मौजूद रोहिनी देवी बताती हैं कि पूरे परिवार को बुखार आ रहा है।

एक दिन पहले वे रामकोट से आई थीं, इंतजार के बाद इमर्जेन्सी में डाक्टर को दिखाकर चली गई थीं। आज भी ओपीडी में चिकित्सक नदारद हैं। चर्म रोग समस्या को लेकर विनीता सिंह का कहना है कि तीन दिनों से कोई डाक्टर ओपीडी कक्ष में बैठ ही नहीं रहा है। ऐसी ही स्थिति बनी रही तो हम लोग कहां जाएंगे। परिसर में मौजूद कई तीमारदार अपने मरीज को दिखाने के लिए चिकित्सकों को ढूंढते दिखाई दिए।
वार्ड में भी दिखाई पड़ा असर
महिला वार्ड में तीमार मोहिनी, संगीता और बिटाना मिलीं। पूछने पर बताया कि कल से कोई डाक्टर उनके मरीज को देखने नहीं आया है। सिर्फ नर्स ही आकर अपना काम कर जाती हैं। चिल्ड्रेन वार्ड के बाहर रामकोट, बिसवां और तालगांव से आए कई परिवार मिले। पूछने पर बताते हैं कि अगर ऐसी स्थिति बनी रही तो मजबूरों में वे लोग बीमार बच्चे को लेकर जाना पड़ेगा।
शासन को कराया गया अवगत
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके सिंह का कहना है कि जिला अस्पताल में 38 चिकित्सकों का स्टाफ था, कुछ समय पहले कई चिकित्सक स्थानांतरित हो गए। हाल ही में सात और चिकित्सकों के स्थानांतरण के बाद केवल 14 चिकित्सक ही बचे हैं। अब आयुष और संविदा पर तैनात चिकित्सकों से मदद लेनी पड़ रही है। शासन को अवगत करा दिया गया है।
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