मुरादाबाद : देश की सुरक्षा में खतरा बने पश्चिम यूपी के फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज

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मुरादाबाद,अमृत विचार। किराए के कमरे से ही नहीं, बल्कि बिस्तर के नीचे तक से संचालित होने वाले फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज देश की सुरक्षा में सेंध लगा रहे हैं। फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज के सिलसिलेवार पकड़े जाने से सुरक्षा एजेंसियों तक के कान खड़े हैं। संदेह है कि फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का फायदा वह विदेशी एजेंसियां अपने …

मुरादाबाद,अमृत विचार। किराए के कमरे से ही नहीं, बल्कि बिस्तर के नीचे तक से संचालित होने वाले फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज देश की सुरक्षा में सेंध लगा रहे हैं। फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज के सिलसिलेवार पकड़े जाने से सुरक्षा एजेंसियों तक के कान खड़े हैं। संदेह है कि फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का फायदा वह विदेशी एजेंसियां अपने हितों में उठा सकती हैं, जो भारत विरोधी गतिविधि में वर्षों से लिप्त हैं।

एसओजी व मझोला पुलिस ने रविवार को संयुक्त रूप से एक फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया था। किराए के मकान से फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज चलाने के आरोपी मोहम्मद कदीम व मोहम्मद मेहराज पुत्र मोहम्मद रहीस ने कबूला कि विदेशों से आने वाली इंटरनेशनल काल को वह लोकल काल में परिवर्तित करते थे। इससे पहले मई 2021 में मझोला थाना क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट नगर में एक मकान पर छापेमारी करते नोएडा पुलिस पहले ही एक फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज का भंडाफोड़ कर चुकी थी।

पुलिस ने बताया था कि भोजपुर थाना क्षेत्र के लालूवाला गांव का रहने वाला उवैश आलम एक साफ्टवेयर कंपनी का इंजीनियर है। अमेरिका में नौकरी कर चुका युवक नोएडा व मुरादाबाद में एक साथ फर्जी टेलीफोन बूथ का संचालन कर रहा था। 14 मई 2022 को ऐसा ही टेलीफोन एक्सचेंज पकड़ने का दावा मेरठ पुलिस भी कर चुकी है। हत्थे चढ़े सभी अभियुक्तों के तार विदेश में मिले। हालांकि उन्होंने अपराध का अल्पीकरण करने की कोशिश की। महंगे इंटरनेशनल काल को लोकल बनाकर स्थानीय लोगों को कम कीमत में अपनों से बातचीत करने का मौका देने का दावा किया। आरोपियों का दावा सुरक्षा विशषेज्ञों के गले के नीचे नहीं उतर रहा।

तो अधूरा सच बता रहे हत्थे चढ़े आरोपी
डॉ. भीमराव आंबेडकर पुलिस अकादमी के अतिथि प्रवक्ता व पूर्व सीओ बीके सिंह पकड़े जा रहे फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज को देश की सुरक्षा के लिहाज से खतरा मानते हैं। वह कहते हैं कि पाकिस्तान व भारत में जब भी जंग होती थी, तब सुरक्षा गतिविधियों से संबंधित सूचनाएं हासिल करने के लिए विदेशी एजेंसियां ऐसी ही तकनीकी का इस्तेमाल करती थीं। रही बात एक वर्ष के भीतर मेरठ, मुरादाबाद, व नोएडा में फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज के पकड़े जाने की तो प्रकरण बेहद गंभीर है। पूछताछ में सगे भाइयों ने कबूला कि एक्सचेंज चलाने के बदले उन्हें महीने में महज 40 हजार रुपये मिलते थे।

आतंकी नेटवर्क का हो चुका है भंडाफोड़
वर्ष 2017 में मध्य प्रदेश पुलिस एक ऐसे ही आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ कर चुकी है। एटीएस ने बलराम सिंह निवासी रीवा को सतना से पकड़ा था। उसके कब्जे से 100 से ज्यादा सिम कार्ड और करीब इतने ही बैंक खाते मिले थे। सिमकार्ड का इस्तेमाल वह बातचीत व खाते का उपयोग पैसे ट्रांसफर करने में करता था। सतना से गिरफ्तार मास्टर माइंड बलराम निजी टेलीफोन एक्सचेंज चलाता था। पाकिस्तान से आने वाली इंटरनेट कॉल को मोबाइल कॉल में कन्वर्ट कर वह चाहे गए नंबरों पर बात भी कराता था।

राजस्थान पर गड़ी मझोला पुलिस की नजर
फर्जी टेलीफोन बूथ की तह तक पहुंचने की कवायद में जुटी मझोला पुलिस की नजर फिलहाल राजस्थान पर गड़ गई है। सीओ आशुतोष तिवारी के मुताबिक जितने भी सिमकार्ड आरोपियों के कब्जे से बरामद हुए हैं, वह सभी राजस्थान से जारी हुए हैं। ऐसे में पुलिस पता लगाएगी कि भारी तादाद में सिमकार्ड जारी करने के पीछे कौन लोग हैं, जिन्होंने फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित करने में अहम किरदार अदा किया। जांच जारी है। सिर्फ दो अभियुक्त ही गिरफ्तार हैं।

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