लखीमपुर-खीरी: बाल वैज्ञानिक बनने के लिए 30 सितम्बर कर सकेंगे आवेदन

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अमृतविचार लखीमपुर-खीरी। वैज्ञानिक का नाम सुनते ही बच्चों में एक अलग ही जुनून और चेहरे पर उत्साह दिखायी देता है। इसी सपने को पूरा करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना की शुरूआत की है जिसे इंस्पायर अवार्ड मानक योजना का नाम दिया गया है। इस योजना के तहत जिले भर के विद्यालयों …

अमृतविचार लखीमपुर-खीरी। वैज्ञानिक का नाम सुनते ही बच्चों में एक अलग ही जुनून और चेहरे पर उत्साह दिखायी देता है। इसी सपने को पूरा करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना की शुरूआत की है जिसे इंस्पायर अवार्ड मानक योजना का नाम दिया गया है। इस योजना के तहत जिले भर के विद्यालयों से बच्चों को योजना का लाभ बताने और उनसे फार्म आनलाइन कराने के निर्देश दिये गये है। योजना के तहत आवेदन करने की अन्तिम तिथि 30 सितम्बर रखी गयी है।

इस योजना में चयनित हुए बच्चों को बाल वैज्ञानिक की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा और 10 हजार रूपये की राशि बतौर पुरस्कार स्वरूप दी जाएगी। शुरूआती कक्षाओं में पढने वाले पहले से ही अपने दिल दिमाग में यह रखते हैं कि उन्हें आगे चलकर क्या बनना है। कोई डाक्टर, वकील, इंजीनियर बनने के साथ ही तमाम बच्चे वैज्ञानिक बनने की चाह रखते हैं।

बच्चों में वैज्ञानिक बनने की चाह और वह अपने हुनर का अच्छे से प्रदर्शन कर सके इसको लेकर केन्द्र सरकार ने एक बहुत की अच्छी योजना का शुभारम्भ किया। इस योजना केे तहत बच्चे अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन करते हुए बाल वैज्ञानिक भी बन सकते हैं। खीरी जिले में भी ऐसे तमाम प्रतिभाशाल बच्चे पड़े हैं जो बेहतर मंच न मिल पाने की वजह से आगे नहीं बढ पाये। ऐसे बच्चों के लिए केन्द्र सरकार की इंस्यापर योजना किसी संजीवनी से कम नहीं दिखायी दे रही है।

इस योजना का हिस्सा बनने के लिए छात्र-छात्राओं को आनलाइन पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा साथ ही तैयार किया गया प्रोजेक्ट को भी उसी पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसके लिए 30 सितम्बर की डेट अन्तिम डेट है। योजना में किसी भी विद्यालय में अध्धयनरत् कक्षा छः से लेकर दसवीं के छात्र-छात्राएं हिस्सा बन सकते है। पिछले दिनों एक विजिट के दौरान खीरी जिला आये मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डा. दिनेश कुमार ने डीआईओएस के साथ साथ राजकीय इण्टर कालेज खीरी के प्रधानाचार्य से हुई मुलाकात के दौरान इस योजना को बच्चों तक पहुंचाने की बात कही थी।

बता दें कि इस योजना के तहत विशेषज्ञों द्वारा चयनित किये गये दस प्रतिशत वैज्ञानिक माडलों को चुना जाएगा और इस माडल को बनाने वाले छात्र-छात्राओं को बाल वैज्ञानिक की उपाधि से नवाजते हुए 10 हजार रूपये की धनराशि उपहार स्वरूप दी जाएगी। फिलहाल डीआईओएस डा. अमरकांत सिंह भी इस योजना पर अधिक ध्यान देते हुए नजर आ रहे है।

खीरी में वैज्ञानिक बनकर मिशाल बन चुके हैं मनीर खां
जिले की बेहजम तहसील के रहने वाले समीउल्ला खां के बेटे मुनीर ने छोटे गांव से उठकर सपनों की उडान भरने वाले मो. मुनीर खां जिले के लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत के साथ साथ एक मिशाल बने। मुनीर ने तमाम तरह के प्रयोग करके वैज्ञानिक मुनीर के नाम से फेमस हो गये। मुनीर आज अमेरिका में रहकर अपने देश के साथ साथ अपने गांव का नाम रोशन कर रहे है। मुनीर भी छोटे विद्यालय से पढ़कर आगे बढे और वैज्ञानिक बने।

जागरूक नहीं दिखायी दे रहा विद्यालय प्रबंधन
केन्द्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना को इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के उद्देश्य को पूरा करने में दिलचस्पी नहीं ने रहे हैं। जिले के विद्यालय प्रबंधकों का इस योजना में शामिल न होने के वजह से बच्चे अपना रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहे है। एक जुलाई से शुरू हुआ इस योजना के आनलाइन आवदेनों की अवधि भले ही दो महीनों का समय दिया गया हो लेकिन जब तक विद्यालय के प्रधानाचार्य और प्रबंधतंत्र जागरूक नहीं होेंगे इसका उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा।

वर्जन फोटो संख्या 29 डा. दिनेश कुमार
30 सितम्बर तक पोर्टल पर अपलोड किये गये माडलों के अवलोकन के लिए जिला स्तर पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा जिससे तहत माडलों को चयनित किया जाएगा। इस योजना के चयनित बच्चे को 10 हजार और यदि राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली प्रदर्शनी में यदि किसी भी बच्चे का माडल चयन किया जाता है तो उस बच्चे को 50 हजार रूपये बतौर पुरस्कार के रूप में प्रदान किये जाएंगे—डा. दिनेश कुमार, मण्डलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी।

 

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