मुरादाबाद : स्कूल चलो अभियान को आईना दिखाकर बच्चों में जगाई शिक्षा की अलख

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मुरादाबाद,अमृत विचार। भारी भरकम धनराशि खर्च करने वाले स्कूल चलो अभियान को आईना दिखाने वाली यह कहानी है। रतनपुर कलां के राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज में छात्र-छात्राओं को स्कूल बुलाने का नया मॉडल सामने आया है। तीन कक्षाओं के लिए 450 से अधिक नामांकन हो चुका है। जबकि, पांच अगस्त तक इन कक्षाओं में प्रवेश होना …

मुरादाबाद,अमृत विचार। भारी भरकम धनराशि खर्च करने वाले स्कूल चलो अभियान को आईना दिखाने वाली यह कहानी है। रतनपुर कलां के राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज में छात्र-छात्राओं को स्कूल बुलाने का नया मॉडल सामने आया है। तीन कक्षाओं के लिए 450 से अधिक नामांकन हो चुका है। जबकि, पांच अगस्त तक इन कक्षाओं में प्रवेश होना है।

यानी, जहां चाह वहीं राह… का फार्मूला इस राजकीय कालेज सटीक बैठता है। वर्ष 2018 में विद्यालय भवन बनकर तैयार हो गया, लेकिन दो साल तक कक्षाओं का संचालन नहीं हो सका। उसके बाद प्रशासन ने विद्यालय भवन को अस्थाई जेल के तौर पर परिवर्तित कर दिया। यह भवन कोरोना काल में कैदियों के नाम रहा। जबकि 10 अगस्त 2021 से विद्यालय शिक्षा का तराना गुनगुना रहा है। पहले सत्र में केवल दर्जा नौ की कक्षाएं चलीं। तब 250 छात्र- छात्राओं ने नामांकन कराया।

चालू सत्र में कक्षा छह, नौ और 10 में प्रवेश लिए जा रहे हैं। अब तक 450 से अधिक छात्र-छात्राओं का पंजीयन हो चुका है, इसके लिए न तो विभाग ने एक रुपये खर्च किये हैं और न ही किसी तरह के प्रचार- प्रसार कराए गए हैं। कार्यवाहक प्रधानाचार्य बबिता महरोत्रा चाहती हैं कि हमें शुरुआती दौर में भवन को विद्यालय बताने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी, क्योंकि लोग इसे कारागार समझते थे। अभी बिजली का कनेक्शन नहीं है, लेकिन टॉयलेट, टेबल-बेंच की सुविधा उपलब्ध है। चार अध्यापक और दो लिपिक हैं।

वैसे तो इस विद्यालय में 17 अध्यापकों के पद नियत हैं, जिसमें 10 प्रवक्ता होंगे और सात सहायक अध्यापक। अभी मात्र चार लोगों के सहयोग से कक्षाओं का संचालन शुरू है। बबिता बतातीं हैं कि आरंभ में हमने गांव के प्रधान से मदद मांगी। जूनियर विद्यालय के प्रधानाचार्य और अध्यापक से संपर्क में दो महीने तक भागदौड़ करनी पड़ी। उसके बाद विद्यालय में नामांकन कराने वाले छात्र छात्राओं का सिलसिला तेज हो गया। अब पांच अगस्त तक नामांकन कार्य होना है। मुझे उम्मीद है कि 600 से अधिक छात्र-छात्राएं इस विद्यालय के पास होंगी।

यानी कि अगर संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो सफलता निश्चित है। वर्ष 2011 से सेवा में आईं महरोत्रा ने 10 साल के अध्यापन कार्य में कई कीर्तिमान रचे हैं। कुचावली और हुसैनपुर के विद्यालयों से दो- दो छात्र राष्ट्रीय विज्ञान प्रतियोगिता में चुने गए। रतनपुरकला भी यह कीर्तिमान रचने वाला विद्यालय होगा।

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