World Plastic Surgery Day पर बोले डॉ. रवि कुमार- प्लास्टिक सर्जरी से दूर की जा सकती हैं शारीरिक विकृतियां
लखनऊ। विश्व के पहले प्लास्टिक सर्जन व सर्जरी के जनक आचार्य सुश्रुत की याद में आज रीवर बैंक कालोनी स्थित आईएमए सभागार में आईएमए की तरफ विश्व प्लास्टिक सर्जरी-डे मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में कार्यरत प्लास्टिक सर्जरी के डॉक्टरों को उनके विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया। जिन चिकित्सकों …
लखनऊ। विश्व के पहले प्लास्टिक सर्जन व सर्जरी के जनक आचार्य सुश्रुत की याद में आज रीवर बैंक कालोनी स्थित आईएमए सभागार में आईएमए की तरफ विश्व प्लास्टिक सर्जरी-डे मनाया गया। कार्यक्रम के दौरान राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में कार्यरत प्लास्टिक सर्जरी के डॉक्टरों को उनके विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

जिन चिकित्सकों को सम्मानित किया गया, उनमें एसजीपीजीआई के प्लास्टिक सर्जन प्रो. अंकुर भटनागर, केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में कार्यरत प्लास्टिक सर्जन डॉ. रवि कुमार, केजीएमयू स्थित प्लास्टिक सर्जरी विभाग के बर्न यूनिट की क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉ. अंशु सिंह का नाम प्रमुख रूप से शामिल है। केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्लास्टिक सर्जन डॉ. रवि कुमार ने कहा कि कैंसर के बहुत से मरीजों को शरीरिक विकृतियों का दंश झेलना पड़ता है।
इतना ही नहीं कैंसर में कई बार सर्जरी करना पड़ता है,उससे भी चेहरे व शरीर के अन्य जंगहों पर विकृत आ सकती है। ऐसे में शारीरिक विकृतियों को दूर करने के लिए जांघ से मॉस, टॅाग की हड्डी व मॉस से चेहरे की हड्डी व पूरे चेहरे को दोबारा से सामान्य बनाया जा सकता है, उन्होंने बताया कि शारीरिक ढांचे में आई विकृति को प्लास्टिक सर्जरी की मदद से दूर किया जा सकता है। जिससे व्यक्ति क्वालिटी व क्वांटिटी ऑफ लाइफ अच्छी हो सके । वहीं
केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग की बर्न यूनिट की क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉ. अंशु सिंह ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति जल जाता है तो सबसे पहले जले हुऐ मरीज को अस्पताल पहुंचाने से पहले बचाव व देखरेख की खासी जरूरत होती है,नहीं तो आगे चलकर दिक्कत बढ़ सकती है।
उन्होंने बताया कि अलग-अलग तरह के जले हुए मरीजों में अलग-अलग सावधानी व केयर करने की जरूरत होती है, मामूली रूप से जलने के जख्म तो समय के साथ ठीक हो जाते हैं, लेकिन गंभीर रूप से जलने पर संक्रमण का खतरा अधिक होता है,साथ ही घाव को भरने के लिए देखभाल की आवश्यकता अधिक होती है। उन्होंने बताया कि शरीर के जो हिस्सा जला हो उसको नल के नीचे करीब 15 से 20 मिनट रखना चाहिए,जिससे सामान्य जल जले हुये हिस्से पर पड़ता रहे,इसके अलावा गंभीर रूप से जले हुये व्यक्ति को तत्काल सबसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए।

एसजीपीजीआई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रो. अंकुर भटनागर ने बताया कि दुपहिया वाहन हाथ, कंधे व अन्य शारीरिक नसों की चोटों के लिये सबसें अधिक जिम्मेदार है। इन स्थानों पर लगी चोट का यदि समय रहते इलाज मिल जाये,तो मरीज का स्वास्थ्य अच्छा हो सकता है।
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डे-केयर सेंटर के प्लास्टिक सर्जन डॅा. विवेक गुप्ता ने बताया कि प्लास्टिक सर्जरी के द्वारा किसी भी तरह के शारीरिक नुकसान को पुन: ठीक किया जा सकता है लेकिन चिकित्सा विज्ञान की इस शाखा की भी कुछ सीमायें हैं, लेकिन लेजर सर्जरी के माध्यम से अनचाहे बाल, त्वचा पर निशान, जलने या चोट के निशान आदि को ठीक किया जा सकता है।
डॉ. विवेक गुप्ता ने बताया लेजर सर्जरी से कोई नुकसान नहीं होता है।
