बच्ची के साथ दुराचार करने वाला राहत का हकदार नहीं, हाईकोर्ट ने उम्र कैद की सजा को रखा बरकरार
लखनऊ, विधि संवाददाता। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 11 माह की बच्ची के साथ दुराचार करने वाले अभियुक्त को कोई भी राहत देने से इंकार कर दिया है। न्यायालय ने उसकी अपील को खारिज करते हुए, उसे सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई उम्र कैद की सजा को बरकरार रखा है। यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा …
लखनऊ, विधि संवाददाता। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 11 माह की बच्ची के साथ दुराचार करने वाले अभियुक्त को कोई भी राहत देने से इंकार कर दिया है। न्यायालय ने उसकी अपील को खारिज करते हुए, उसे सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई उम्र कैद की सजा को बरकरार रखा है। यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति सरोज यादव की खंडपीठ ने अभियुक्त श्रवण कुमार मौर्या की अपील पर पारित किया।
मामले में सीतापुर जनपद के मछरेटा थाने में बच्ची के पिता ने 19 मार्च 2006 को एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर में कहा गया कि घटना के दिन उसकी बेटी घर के बाहर बने चबुतरे पर खेल रही थी। इसी दौरान अभियुक्त उसे टोफ़ी दिलाने का बहाना कर फूस के बने अपने घर में ले गया व उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची का रोना सुनकर वादी, उसकी पत्नी, उसका साला तथा गांव के शरदेंदु दीक्षित भागकर अभियुक्त के घर में पहुंचे तो वह वहां से भाग गया। बच्ची वहीं पड़ी हुई थी व उसकी हालत काफी गम्भीर थी।
अभियुक्त की ओर से दलील दी गई कि उसे झूठा फंसाया गया है। कहा गया कि गवाह शरदेंदु दीक्षित उससे अपने खेत में काम करवाना चाहता था लेकिन उसने इंकार कर दिया था, इसी वजह से उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। यह भी दलील दी गई कि अभियोजन के मुताबिक बच्ची काफी गम्भीर अवस्था में थी लेकिन उसे छह घंटे बाद अस्पताल ले जाया गया।
दलील दी गई कि इतनी छोटी बच्ची ऐसी गम्भीर अवस्था में सर्वाइव नहीं कर सकती। हालांकि न्यायालय ने अपीलार्थी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों के बयानों से बच्ची के साथ दुष्कर्म की पुष्टि होती है। साथ ही घटना के चश्मदीदों ने अभियुक्त की संलिप्तता को पुष्ट किया है।
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