मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण में 21 जुलाई को हो सकता है फैसला

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यतीश शर्मा, अमृत विचार। मथुरा में श्री कृष्ण जन्म भूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष, स्वयं को श्री कृष्ण के वंशज बताने वाले मनीष यादव, अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह और राजेश्वर महेश्वरी के प्रार्थना पत्र पर अदालत में सुनवाई हुई। पिछले साल न्यायालय में दाखिल किए गए प्रार्थना पत्रों में मांग की गई है कि विवादित स्थान …

यतीश शर्मा, अमृत विचार। मथुरा में श्री कृष्ण जन्म भूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष, स्वयं को श्री कृष्ण के वंशज बताने वाले मनीष यादव, अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह और राजेश्वर महेश्वरी के प्रार्थना पत्र पर अदालत में सुनवाई हुई। पिछले साल न्यायालय में दाखिल किए गए प्रार्थना पत्रों में मांग की गई है कि विवादित स्थान शाही ईदगाह मस्जिद परिसर का सर्वे कराकर कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति की जाए और प्राचीन साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए विवादित स्थल सील कर दिया जाए।

सोमवार को अदालत में करीब आधा घंटे तक दोनों पक्षों में बहस हुई। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायालय ने फैसला रिजर्व रखते हुए अगली सुनवाई की तारीख 21 जुलाई दी। संभावना जताई जा रही है कि इस मामले को लेकर कोर्ट 21 जुलाई को फैसला सुना सकती है।

 

पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सुनवाई के दौरान शाही ईदगाह चाहता था कि 7(11) के तहत उसका निस्तारण हो, लेकिन अपर कोर्ट के द्वारा एक आदेश पारित कर दिया गया है जो वादी पक्ष के प्रार्थना पत्र हैं। उसका निस्तारण होना आवश्यक है। उन्हीं विषय को न्यायालय में सुना गया। जन्मभूमि पक्ष के अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कोर्ट ने ऑर्डर रिर्जव कर लिया है। 21 जुलाई को यह ऑर्डर आएगा की पहले हमारी एप्लिकेशन सुनी जाएगी या उनके 7 (11 ) की एप्लिकेशन सुनी जाएगी।

वहीं शाही ईदगाह के इंतजामिया कमेटी के सचिव और अधिवक्ता तनवीर अहमद ने बताया कि वादी पक्ष मुकदद्मे को टालने के लिए नए नए एप्लिकेशन डालते रहते हैं। 7 रूल 11 के तहत यह तय होना है ये चलने लायक है या नहीं। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता का कहना था कि पूर्व में श्री कृष्ण विराजमान के केस के मेंटेनेबल और नॉन मेंटेनेबल को लेकर जिला न्यायालय में सुनवाई हो चुकी है जहां जिला जज की अदालत मामले को खारिज कर चुकी है और केस को मेंटेनेबल माना गया है।

मुस्लिम पक्ष ने न्यायालय से मांगा समय
मुस्लिम पक्ष द्वारा सिविल जज सीनियर डिविजन की अदालत से हिंदू पक्ष द्वारा दायर किए गए ऑब्जेक्शन की कॉपी उन्हें अभी मिली है, इसलिए उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मिलना चाहिए। जिस पर न्यायालय द्वारा समय देते हुए सुनवाई की अगली तारीख 11 जुलाई दे दी थी। लेकिन 11 जुलाई को नो वर्क होने के चलते सुनवाई टल गई थी। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 18 जुलाई दी थी।

जन्मभूमि से संबंधित दस्तावेज सौंपे कोर्ट को
मथुरा न्यायालय केस के मेंटेनेबल और नॉन मेंटेनेबल मामले पर भी सुनवाई करेगा, तो वही हिंदू पक्ष शाही ईदगाह के सर्वे, कोर्ट कमीशन और स्टे के लिए दिए गए प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के लिए भी न्यायालय से अनुरोध करेगा। इस संबंध में हिंदू पक्ष ने न्यायालय में जन्मभूमि की रजिस्ट्री की कॉपी के साथ ही खसरा खतौनी और मथुरा नगर निगम से जुड़े हुए दस्तावेज न्यायालय के सामने पेश किए हुए हैं ।

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