लखीमपुर-खीरी: कोतवाल ने श्रद्धालुओं की गर्दन पकड़कर निकाला बाहर, पुजारी ने बंद की श्रंगार पूजा
गोला गोकर्णनाथ, अमृत विचार। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सावन के महीने में कांवड़ियों, श्रद्धालुओं पर फूल बरसाकर निर्बाध दर्शन कराने के आदेश दिए हैं, किंतु यहां के पौराणिक शिव मंदिर में कोतवाली पुलिस ने शिव पूजा करने आए श्रद्धालुओं की गर्दन पकड़ कर, धक्के मारकर मंदिर से बाहर निकाल दिया, जिससे रुष्ट होकर …
गोला गोकर्णनाथ, अमृत विचार। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सावन के महीने में कांवड़ियों, श्रद्धालुओं पर फूल बरसाकर निर्बाध दर्शन कराने के आदेश दिए हैं, किंतु यहां के पौराणिक शिव मंदिर में कोतवाली पुलिस ने शिव पूजा करने आए श्रद्धालुओं की गर्दन पकड़ कर, धक्के मारकर मंदिर से बाहर निकाल दिया, जिससे रुष्ट होकर पुजारी ने श्रृंगार पूजा बंद करवा दी। कोतवाल ने पुजारी और उनके बेटे से भी अभद्रता की है।
रविवार रात लगभग 9रू15 बजे शिव मंदिर में श्रद्धालु भगवान शिव की श्रंगार पूजा देखने गए थे। मंदिर के पुजारी पं दिनेशचंद्र मिश्र जाल ऊपर उठाकर श्रंगार पूजा की तैयारियां कर रहे थे, तभी मंदिर में पीली टीशर्ट पहने कोतवाल विवेक कुमार उपाध्याय पहुंचे और उन्होंने शिवजी के दर्शन, पूजन के लिए आए श्रद्धालुओं की गर्दन पकड़ कर, धक्के मारकर मंदिर से बाहर करना शुरू कर दिया।
साथ मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी शिव भक्तों को धक्के मार कर मंदिर से बाहर निकाल दिया। जब पुजारी ने विरोध किया तो कोतवाल ने पुजारी और उनके पुत्र के साथ भी दुर्व्यवहार किया। पुजारी दिनेश चंद्र मिश्र ने कड़ा ऐतराज कर शिवलिंग के ऊपर उठाया गया जाल बंद कर बिना श्रंगार पूजा सम्पन्न कराए ही मंदिर से बाहर निकल आए।
बाद में श्रद्धालुओं के आग्रह पर पुजारी पं दिनेशचंद्र मिश्र पुनः मंदिर में गए और श्रंगार पूजा शुरू कराई। किंतु पुलिस कर्मियों के दुर्व्यवहार के कारण मंदिर के अंदर कम श्रद्धालु रहे। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से श्रद्धालुओं में काफी रोष है। लोगों ने दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की है।
पौराणिक शिव मंदिर के अंदर चार सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं जिनसे मंदिर के बाहर लगे टीवी में लगे टीवी में प्रसारण भी हो रहा था। इस घटना की फुटेज सीसीटीवी कैमरे में कैद है। हिंदू युवा वाहिनी के जिला प्रभारी विपिन कुमार मिश्र ने कोतवाल की कार्रवाई पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस को मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही श्रद्धालुओं को रोकना चाहिए था। मंदिर के अंदर पुलिस जाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को शिकायत भेजी है।
मंदिर के अंदर नहीं रहती थी पुलिस
नगर के बुजुर्गवार और भोलेनाथ की आस्था से जुड़े वयोवृद्घ लोग बताते हैं कि छोटी काशी के पौराणिक शिव मंदिर के अंदर पहले पुलिस नहीं रहती थी। पुलिस का सुरक्षा घेरा प्रवेश द्वार के बाहर, गोकर्ण तीर्थ परिसर और नगर के प्रमुख स्थानों पर रहता था। पिछले कुछ वर्षों से पुलिस मंदिर के अंदर भी जाने लगी है। सीमित स्थान में बने गर्भ गृह में पुलिस कर्मियों की मौजूदगी से पूजा करने वाले श्रद्धालुओं को भी दिक्कतें होने लगी हैं।
पौराणिक शिव मंदिर में आरती का समय था, श्रंगार पूजा हो रही थी। तभी पुलिस आई और शिव भक्तों के साथ धक्का-मुक्की कर गलेबांन पकड़कर सबको बाहर निकाल दिया। कहीं कोई अरघे में न गिर जाए, इसलिए उन्होंने जाल बंद करा दिया। मंदिर के अंदर भक्तों के साथ धक्का मुक्की, अभद्रता घोर निंदनीय और अनुचित है। पूर्व में सावन के प्रत्येक सोमवार को इससे अधिक भीड़ होती रही है। लेकिन शिव मंदिर के इतिहास में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई।- पं दिनेशचंद्र मिश्र, पुजारी, पौराणिक शिव मंदिर, गोला गोकर्णनाथ।
पौराणिक शिव मंदिर में पहुंची पुलिस ने श्रद्धालुओं से हाथ जोड़कर कई बार लोगों से मन्दिर से बाहर निकलने का निवेदन किया। न मानने पर पुलिस के पास इसके अलावा कोई दूसरा चारा नहीं था। प्रशासन अपना काम करेगा ही, श्रद्धालुओं के साथ यही होना चाहिए था।- जनार्दन गिरि अध्यक्ष, शिव मंदिर कमेटी, गोला ।
रविवार की रात आरती और श्रंगार पूजा के समय गर्भ गृह में काफी लोग जमा हो गए थे जो लंबे समय के लिए बैठ गए। उन्हें बाहर निकालने के लिए मंदिर कमेेटी के अध्यक्ष जनार्दन गिरि से अनुरोध किया कि अंदर काफी देर से एकत्रित भीड़ को बाहर निकलवाया जाए, ताकि श्रंगार पूजा पूर्ण होकर मंदिर के कपाट बंद किए जा सकें और सोमवार के लिए होने वाली भीड़ को समय से दर्शन कराए जा सके।- विवेक कुमार उपाध्याय, कोतवाली निरीक्षक, गोला गोकर्णनाथ।
रविवार की रात मंदिर के अंदर बहुत ज्यादा भीड़ हो गई थी। उनसे निवेदन भी किया गया लेकिन कोई बाहर निकलने को तैयार नहीं हो रहा था। आरती का समय था। इसलिए भीड़ को कम करने के लिए बाहर निकाला गया।- राजेश कुमार, सीओ, गोला।
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