बरेली: सेंट फ्रांसिस स्कूल ने कृपाण, पगड़ी पर लगाई रोक, भड़का सिख समुदाय, जमकर हंगामा

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बरेली, अमृत विचार। शहर के नामचीन स्कूल सेंट फ्रांसिस में गुरुवार सुबह जबर्दस्त हंगामा खड़ा हो गया। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे अभिभावकों ने स्कूल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उनकी स्कूल प्रशासन से तीखी नोकझोंक भी हुई। इसकी वजह ये थी कि स्कूल प्रबंधन ने सिख समाज के बच्चों …

बरेली, अमृत विचार। शहर के नामचीन स्कूल सेंट फ्रांसिस में गुरुवार सुबह जबर्दस्त हंगामा खड़ा हो गया। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे अभिभावकों ने स्कूल के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उनकी स्कूल प्रशासन से तीखी नोकझोंक भी हुई। इसकी वजह ये थी कि स्कूल प्रबंधन ने सिख समाज के बच्चों को धार्मिक प्रतीक पहनकर न आने के लिए कहा था।

स्कूल के प्रबंधन ने मिलने से किया इनकार
दरअसल, बुधवार को स्कूल प्रशासन ने करीब 40 बच्चों को बुलाकर उनसे धार्मिक प्रतीक कड़ा, कृपाण और पगड़ी पहनकर आने से मना किया था। इस बात को घर पहुंचकर बच्चों ने अपने अभिभावकों को बताया। जिसको लेकर आज सुबह सिख समाज के लोग स्टेडिम रोड स्थित गुरुद्वारा दख निवारण साहिब जी पहुंचे और स्कूल के फरमान पर बैठक में चर्चा की, जहां से बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर सभी नारेबाजी करते हुए सुबह 10 बजे स्कूल पहुंच गए। इस दौरान उनके साथ अभिभावक संघ के पदाधिकारी भी थे। वहीं जब स्कूल प्रबंधन ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया तो उसके बाद हंगामा होने लगा।

मामला बढ़ता देख मांगी माफी
सिख समाज ने धार्मिक प्रतीक पर रोक लगाने के विरोध में स्कूल प्रशासन मुर्दाबाद के जमकर नारे लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया और धरने पर बैठ गए। इस दौरान उनकी स्कूल प्रशासन के साथ तीखी नोकझोंक भी हुई। इस बीच सूचना मिलने पर पुलिस फोर्स भी मौके पर पहुंच गया।

वहीं हंगामा बढ़ता देख आखिर में स्कूल प्रबंध को झुकना पड़ा, जिसके बाद अभिभावकों के प्रतिनिधिमंडल में स्कूल प्रबंध से मिलकर सिख समाज के धार्मिक प्रतीक पर प्रतिबंध लगाने पर अपना कड़ा विरोध जताया। जिस पर स्कूल प्रबंध ने सफाई देते हुए माफी मांगी और बच्चों को कड़ा, कृपाण और पगड़ी पहनकर आने की इजाजत देने की बात कही। साथ ही स्कूल की प्रिंसिपल ने दोबारा ऐसी घटना न होने का आश्वासन दिया। जिसके बाद हंगामा शांत हुआ।

विदेशों में होती थीं ऐसी घटनाएं
हंगामे के दौरान अभिभावकों का कहना था कि अभी तक उन्होंने इस तरह की घटनाएं विदेशों में सुनी थीं। जहां छात्रों को धार्मिक प्रतिक पहनने पर रोक लगाई जाती थी लेकिन अब बरेली में भी स्कूल प्रशासन धार्मिक प्रतीक धारण करने से मना कर रहा है। इसके अलावा अभिभावकों ने स्कूल की प्रिंसिपल पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। उनका कहना था कि प्रिंसिपल किसी भी मंत्री, नेता और अधिकारी तक की बात को भी नहीं मानतीं। डीआईओएस के आदेश भी उनके सामने बेकार हैं।

मंत्रियों से लेकर सरकारी अधिकारियों की नहीं सुनतीं स्कूल की प्रिंसिपल
स्कूल में अभिभावकों के हंगामे के दौरान वहां आईं सिल्की सक्सेना ने बताया कि प्रिंसिपल किसी भी मंत्री से लेकर नेता व अधिकारी की बात को नहीं मानतीं। डीआईओएस के आदेश भी उनके सामने बेकार है। उनकी बच्ची को प्रताड़ित किया जा रहा है। जबरन उसे कक्षा तीन में पढ़ाने का दबाव बनाया जा रहा है। कोरोना महामारी में भी स्कूल की फीस जमा कराने को लेकर उन को बहुत परेशान किया गया था।

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