मुरादाबाद : अनूठे और अद्भुत रिश्ते को भूलकर फैशन परस्त हुई खाकी
मुरादाबाद,अमृत विचार। वर्दी पाने की चाह में जिन जवानों ने कभी परिश्रम की पराकाष्ठा की, वह वक्त के साथ ही अपने जुनून, जज्बे व प्रतिबद्धता को भूल गए। खाकी से अपने अनूठे व अद्भुत रिश्ते को भूलकर वह फैशन परस्त हो चले हैं। वर्दी अब उनके लिए सिर्फ शोबाजी का जरिया है। यकीन न हो …
मुरादाबाद,अमृत विचार। वर्दी पाने की चाह में जिन जवानों ने कभी परिश्रम की पराकाष्ठा की, वह वक्त के साथ ही अपने जुनून, जज्बे व प्रतिबद्धता को भूल गए। खाकी से अपने अनूठे व अद्भुत रिश्ते को भूलकर वह फैशन परस्त हो चले हैं। वर्दी अब उनके लिए सिर्फ शोबाजी का जरिया है। यकीन न हो तो उन लापरवाह पुलिस कर्मियों पर नजर डालें, जो शोल्डर में कैप फंसाकर ड्यूटी बजाते हैं।
कमर पर बेल्ट बांध कर सड़क पर कदमताल करते हैं। सरे बाजार ड्रेस कोड का माखौल उड़ाने वालों को वर्दी रेगुलेशन तक की फिक्र नहीं है। उच्चाधिकारियों की इच्छाशक्ति में कमी व निगरानी के अभाव ने फैशन परस्त हो चले लापरवाह पुलिस कर्मियों को बिंदास बना दिया है।
दशकों से जारी फैशन के दौर में भी पुलिस की वर्दी का आकर्षण कम नहीं हुआ। देश के जवान व युवा आज भी वर्दी को अपना प्रेरणा स्रोत मानते हैं। यह सिर्फ दावा नहीं बल्कि वह सच है, जिसकी पुष्टि सुरक्षा बलों की भर्ती में लगने वाली युवाओं की लंबी कतार वर्षों से कर रही है। देश का हर युवा मन शरीर पर वर्दी धारण करने चाहत रखता है। दिल की हसरत पूरी करने में वह प्रतिदिन मीलों दौड़ लगा रहा है।
परिश्रम की पराकाष्ठा से भी उसे गुरेज नहीं है। सवाल यह कि जिस वर्दी को पाने में परिश्रम की पराकाष्ठा हुई, उसकी साख से सरेराह खिलवाड़ क्यों हो रहा है? वर्दी अंगीकार करने वालों के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने पुलिस वर्दी रेगुलेशन बनाया। आइपीएस अधिकारी से लेकर कांस्टेबल तक की वर्दी को लेकर शासन का स्पष्ट दिशा निर्देश है। किस पद की वर्दी का रूप रंग क्या होगा? यह पहले से तय है। वर्दी की माप ही नहीं पैंट की मोहरी की चौड़ाई भी तय है। बेल्ट व टोपी लगाने के नियम तय हैं। आरक्षी से लेकर आइपीएस अधिकारी तक को ट्रेनिंग के दौरान वर्दी रेगुलेशन पढ़ाया जाता है। वर्दी के साथ छेड़छाड़ व खाकी को फैशन परस्ती से जोड़ने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ पूर्व में विभागीय कार्रवाई आज भी नजीर है।
अधिकारियों ने बदला वर्दी का अंदाज
वर्दी के साथ कुछ पुलिस कर्मी मनमानी कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर वर्दी को लेकर आज भी सजग हैं। बेल्ट नाभी के पास बांधने का नियम है लेकिन अब अधिकांश पुलिस कर्मी नितंब के पास बेल्ट लगा रहे हैं। पतलून की तंग मोहरी में पुलिस का कार्य असंभव है। फिर भी अधिकांश पुलिस कर्मी चुस्त वर्दी पहन रहे हैं। पुलिस उपाधीक्षक व उनके मातहत फैशन व च्वाइस के मुताबिक वर्दी का निर्धारण करने लगे हैं। थाना प्रभारी व संबंधित क्षेत्राधिकारी का दायित्व है कि वह अपने हमराज व ड्राइवर की वर्दी प्रतिदिन चेक करें।
उत्साहवर्धन व निगरानी से बदलेंगे हालात
पुलिस लाइन में साप्ताहिक परेड के दौरान एसएसपी मानक के अनुरूप वर्दी पहनने वालों को पुरस्कृत करें। मानक का उल्लंघन करने वालों को दंड दें। पुलिस कर्मियों की फैशन परस्ती खाकी की छवि धूमिल करती है। जो पैटर्न है, वही वर्दी धारण करनी होगी। अधिकांश वाहन चालक कैप लगाकर ड्यूटी नहीं करते। यूपी के पूर्व डीजीपी श्रीराम अरुण ने कानपुर में फोरेज कैप यानि कि जनरल मानिक शाह कैप लगाने की प्रथा खत्म की। क्योंकि अधिकांश पुलिस कर्मी उक्त कैप फोल्ड कर के बैक पाकिट में रखते थे। अब गोल टोपी सोल्डर में फंसाई जा रही है। आफिस अथवा थाने में सिर्फ चमड़े की बेल्ट का उपयोग पुलिस कर्मी कर सकता है। -बीके सिंह, सेवानिवृत्त सीओ व पुलिस अकादमी के अतिथि प्रवक्ता
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