बरेली: किसानों को बताए गए गोआधारित प्राकृतिक खेती के लाभ
बरेली, अमृत विचार। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से शनिवार को गांव हमीरपुर में भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति के तहत एक दिवसीय गो आधारित प्राकृतिक खेती विषय पर प्रशिक्षण व विधि प्रदर्शन का आयोजन किया गया, जिसमें गो आधारित प्राकृतिक खेती से होने वाले लाभ व सावधानियों पर चर्चा की गई। …
बरेली, अमृत विचार। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से शनिवार को गांव हमीरपुर में भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति के तहत एक दिवसीय गो आधारित प्राकृतिक खेती विषय पर प्रशिक्षण व विधि प्रदर्शन का आयोजन किया गया, जिसमें गो आधारित प्राकृतिक खेती से होने वाले लाभ व सावधानियों पर चर्चा की गई।
कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी डा. बृजपाल सिंह ने प्राकृतिक खेती को न्यूनतम लागत वाली खेती बताते हुए अधिक से अधिक किसानों को इसे छोटे स्तर पर अपनाने की सलाह दी। विषय वस्तु विशेषज्ञ राकेश पांडेय ने कहा कि मृदा में रहने वाले जीवाणु, जो मिट्टी से पोषक तत्वों को पौधों को उपलब्ध कराते हैं, उन्हीं जीवाणुओं को प्राकृतिक खेती द्वारा सशक्त किया जाता है। आधुनिक तकनीक व रसायनों से युक्त खेती में इन जीवाणुओं की संख्या बहुत कम हो गई है, जिसको प्राकृतिक खेती द्वारा फिर से बढ़ाया जा रहा है।
कार्यक्रम सहायक वाणी यादव ने किसानों को प्राकृतिक खेती के गुणों, कम लागत में अधिक मुनाफे, गांव के युवकों को इस खेती में आगे बढ़ने पर जोर दिया। प्रदर्शन कार्यक्रम में 10 किलो देसी गाय का गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 1 किलो बेसन, 1 किलो गुड़ व एक मुट्ठी नीम व बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी प्रयोग करके 200 लीटर जीवामृत तैयार किए,जो 2-3 दिन बाद एक एकड़ खेत में प्रयोग करने के लिए तैयार हो जाएंगे। प्रशिक्षण में 48 किसानों ने भाग लिया।
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