हरदोई: सुनासीनाथ मंदिर से मधुमक्खियों के हमले से भागी थी औरंगजेब की सेना, शिवलिंग पर आज भी मौजूद हैं आरे का निशान
हरदोई। जिले के कस्बा मल्लावा के पास स्थित सुनासी नाथ मंदिर को छोटीकाशी भी कहा जाता है। सावन के महीने में हजारों भक्त यहां कांवर से जल चढ़ाते हैं। सोलहवीं शताब्दी में औरंगजेब ने यहां लूटपाट करने के बाद शिवलिंग को नष्ट करने का प्रयास किया था लेकिन मधुमक्खियों के हमले से औरंगजेब की सेना …
हरदोई। जिले के कस्बा मल्लावा के पास स्थित सुनासी नाथ मंदिर को छोटीकाशी भी कहा जाता है। सावन के महीने में हजारों भक्त यहां कांवर से जल चढ़ाते हैं। सोलहवीं शताब्दी में औरंगजेब ने यहां लूटपाट करने के बाद शिवलिंग को नष्ट करने का प्रयास किया था लेकिन मधुमक्खियों के हमले से औरंगजेब की सेना भाग खड़ी हुई थी।
बताते चलें जब सोलहवीं वी शताब्दी में मुगल शासक औरंगजेब पूरे देश में मंदिरों को लूट रहा था। तभी उसे सुनासी नाथ शिव मंदिर के बारे में पता चला। बताते हैं य शिव मंदिर भी सोने चांदी से आच्छादित था मंदिर में सोना चांदी लूटने के बाद औरंगजेब के सैनिकों ने मंदिर को ध्वस्त कर दिया। इसके बावजूद भी जब औरंगजेब का अत्याचार कम न हुआ तो उसने शिवलिंग पर आरा चलवा कर इसे काटने के निर्देश दिए।
इतिहासकारों के अनुसार जैसे ही औरंगजेब के सैनिकों ने शिवलिंग पर आरा चलाना शुरु किया असंख्य मधुमक्खियों ने सेना को चारों ओर से घेर लिया मधुमक्खियों के हमले से सैनिक बुरी तरह से घायल होकर भागने लगे कई किलोमीटर तक मधुमक्खियों ने सैनिकों का पीछा कर उन्हें भागने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद मुख्य खाकर औरंगजेब लौट गया। आज भी शिवलिंग पर आरा चलने के इस पर निशान दिखाई पड़ते हैं।
गौराखेड़ा वासियों ने लिया था औरंगजेब की सेना से मोर्चा
इतिहास व हरदोई गजेटियर के अनुसार सुनासी नाथ मंदिर पर लूटपाट रोकने के लिए गौराखेड़ा के बहादुरों ने औरंगजेब की सेना से मोर्चा लिया था लेकिन दुर्भाग्यवश मुगलों की सुसज्जित सेना के सामने सीमित संसाधन के ग्रामीण नहीं टिक सके। ग्रामीणों को परास्त करने के बाद ही मुग़ल सेना सुनासी नाथ मंदिर पर आक्रमण कर सकी थी।
हजारों कांवरिया करते हैं जलाभिषेक
सावन के महीने में पवित्र गंगा नदी का जल लेकर हजारों कांवरिया सावन मास भर सुनारसी नाथ महादेव मंदिर पर जलाभिषेक करते हैं। पूरे माह कांवरियों का ताता यहां लगा रहता है सोमवार को मंदिर में तिल रखने की जगह भी नहीं होती है। सुनासीनाथ मंदिर की माता के चलते इसे छोटीकाशी भी कहा जाता है। पूरे सावन के महीने यहां कांवरियों के जत्थे दिन-रात जलाभिषेक को आते रहते हैं।
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