अयोध्या: मणि पर्वत से ही होगा झूलनोत्सव का आगाज, भगवान झूलेंगे झूला

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अयोध्या। धार्मिक नगरी अयोध्या की ओर लोग यूं ही खिंचे चले नहीं आते। यहां की पौराणिक व सांस्कृतिक झलक भी भक्तों को दीवाना बना देती है। 31 से शुरू हो रहे सावन झूलनोत्सव भी इन्हीं संस्कृतियों में से एक है। झूलनोत्सव का आगाज मणि पर्वत से होगा। यहां मंदिरों से निकलकर भगवान मणि पर्वत में …

अयोध्या। धार्मिक नगरी अयोध्या की ओर लोग यूं ही खिंचे चले नहीं आते। यहां की पौराणिक व सांस्कृतिक झलक भी भक्तों को दीवाना बना देती है। 31 से शुरू हो रहे सावन झूलनोत्सव भी इन्हीं संस्कृतियों में से एक है। झूलनोत्सव का आगाज मणि पर्वत से होगा। यहां मंदिरों से निकलकर भगवान मणि पर्वत में झूला झूलते हैं। लाखों की संख्या में लोग भगवान को झूला झुलाने पहुंचते हैं। आज हम आपको उसी मणि पर्वत से जुड़ी कई बातों से रूबरू कराएंगे।

धार्मिक ग्रंथों में मान्यता है कि भगवान राम जब विवाह के उपरांत माता सीता को अयोध्या लेकर आए थे, तब महाराज जनक ने महाराज दशरथ को उपहार स्वरूप मणियों की श्रृंखला भेट की थी, जिसको चक्रवर्ती राजा दशरथ ने विद्या कुंड के पास रखवा दिया था। मणि इतनी ज्यादा थीं कि वहां मणियों का धीरे-धीरे पहाड़ बन गया। आज उसी प्राचीन धरोहर को लोग मणि पर्वत के नाम से जानते हैं।

ऐसी मान्यता है कि इसी मणि पर्वत पर भगवान राम माता सीता के साथ श्रावण मास में तृतीया तिथि (हरियाली तीज) के दिन झूला झूलते थे। त्रेतायुग की यह परंपरा कलयुग में भी चली आ रही है। मणि पर्वत पर भगवान झूला झूलते हैं तो वहीं श्रद्धालु मंदिरों में झूलन उत्सव का आनंद लेते हैं। रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि मणि पर्वत का इतिहास बहुत प्राचीन है।

इसका इतिहास त्रेतायुग के समय का है। वहां पर एक जनौरा नाम का गांव था, जहां पर महाराज जनक ने निवास किया था। उस जगह को जनकौरा भी कहा जाता है क्योंकि महाराज जनक ने यहां पर कौर (भोजन) खाया था। उसी के उपहार स्वरूप महाराज जनक ने राजा दशरथ को बहुत सी मणियां भेंट की थीं।

दर्शन से होती है पुण्य की प्राप्ति

आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि जो भक्त मणि पर्वत पर जाकर दर्शन पूजन करते हैं वे पुण्य की प्राप्ति करते हैं। प्रतिवर्ष यहां सावन में झूलन उत्सव का आयोजन किया जाता है, जहां माता सीता और भगवान राम झूला झूलते हैं। धार्मिक मान्यताओं की दृष्टि से मणि पर्वत अति प्राचीन स्थान है।

सत्येंद्र दास बताते हैं कि मणि एक ऐसी धातु है जो सर्वश्रेष्ठ होती है,उत्तम होती है। मणि कई प्रकार की होती है। मणि शेषनाग से भी निकलती है, लेकिन यह जो मणि है वह अद्वितीय मणि है। यह बहुत ही अनमोल धातु है।

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