लखीमपुर-खीरी: हत्या मामले में कार्रवाई की देरी से पुलिस पर उठ रहे सवाल
लखीमपुर खीरी,अमृत विचार। थाना सिंगाही के गांव सिंगहा खुर्द निवासी दीपक मिश्र हत्याकांड को हुए करीब ढाई महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन गिरफ्तारी तो दूर पुलिस की जांच अभी भी एक कदम आगे नही बढ़ सकी है। इससे पुलिस पर जहां कई गंभीर आरोप लगने लगे हैं। वहीं पुलिस की खुलासे …
लखीमपुर खीरी,अमृत विचार। थाना सिंगाही के गांव सिंगहा खुर्द निवासी दीपक मिश्र हत्याकांड को हुए करीब ढाई महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन गिरफ्तारी तो दूर पुलिस की जांच अभी भी एक कदम आगे नही बढ़ सकी है। इससे पुलिस पर जहां कई गंभीर आरोप लगने लगे हैं। वहीं पुलिस की खुलासे में की जा रही लेटलतीफी से ग्रामीणों में रोष पनप रहा है। ग्रामीणों का यह गुस्सा किसी भी समय सड़क पर फूट सकता है।
थाना सिंगाही के गांव सिंगहा खुर्द निवासी राजकिशोर मिश्र के इकलौते पुत्र का शव 14 मई 2022 को शारदानगर स्थित नहर में थाना फूलबेहड़ क्षेत्र में बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत की वजह सिर में गंभीर चोट होना बताई गई थी। थाना सिंगाही पुलिस ने मृतक के पिता की तहरीर पर दीपक की पत्नी एकता मिश्रा, ससुर संजीव पांडेय साला आकाश और अंशुल के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया था। पुलिस ने शुरुआती दौर में विवेचना में तेजी दिखाई, लेकिन हफ्ते भर बाद जांच की गति काफी धीमी हो गई।
घटना को हुए ढाई महीने से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन पुलिस की जांच जहां की तहां रुकी है। पुलिस आरोपियों को भी अभी तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है। हत्या जैसे मामले में लंबा समय बीतने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से अब ग्रामीणों में भी पुलिस के प्रति रोष पनप रहा है। परिवार वालों ने बताया कि एसओ राजकुमार सरोज का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आई चोट को लेकर उन्होंने 22 जून को राज्य चिकित्सा विधि परामर्शदाता लखनऊ की राय जानने के लिए रिपोर्ट भेजी थी है, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी रिपोर्ट न अभी नहीं आई है।
पीड़ित परिवार मुख्यमंत्री, डीजीपी, आईजी और एसपी से कई बार मिल चुका है। अफसरों के रिपोर्ट तलब करने पर पुलिस एक्सपर्ट की राय के लिए पत्र भेजे जाने और रिपोर्ट मिलने पर गुण दोष के आधार पर विवेचना का निस्तारण करने की रिपोर्ट लगाकर पल्ला झाड़ लेती है। रिपोर्ट कब तक आएगी। आएगी भी या नहीं। इस पर पुलिस कोई सही बात नहीं बता रही है। आरोप है कि पुलिस एक्सपर्ट की जांच जांच रिपोर्ट न मिलने का बहाना बनाकर कार्रवाई करने की बजाय टालमटोल कर रही है।
ग्रामीणों व परिवार वालों ने पुलिस पर आरोपियों से सांठगांठ करने का भी आरोप लगाया है। पुलिस की जांच में देरी और कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में खासा रोष है। ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर किसी भी समय फूट सकता है। मृतक के पिता का कहना है कि कभी पुलिस दरोगा को भेजकर रिपोर्ट मंगवाने की बात बताती है। तो कभी कहती है कि अभी रिपोर्ट नहीं मिली है।
एसओ के विरोधाभासी बयानों से गहराया शक
दीपक मिश्र हत्याकांड की विवेचना एसअ ो सिंगाही राजकुमार सरोज कर रहे हैं। उन्होंने पहले चोट को लेकर 22 जून को रिपोर्ट राज्य चिकित्सा विधि परामर्शदाता लखनऊ को भेजे जाने की बात कही। इसके बाद जब पीड़ित परिवार एसपी से मिला तो पुलिस ने बताया कि राज्य चिकित्सा विधि परामर्शदाता से आई थी, लेकिन उसे दूसरे थाने पर भेज दी गई।
अमृत विचार ने जब एसओ से इस मामले को लेकर जानकारी ली तो उनका कहना था कि जांच रिपोर्ट बंगलुरु से आएगी। इसलिए रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। रिपोर्ट आने पर ही मामले में आगे की जांच बढ़ सकेगी। विवेचक द्वारा मुकदमा वादी को सही जानकारी न देने और अलग-अलग बयानों से पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह है पूरा मामला
थाना सिंगाही के गांव सिंगहा खुर्द निवासी राजकिशोर मिश्र का इकलौता पुत्र दीपक मिश्र (35) अपनी साली की शादी में थाना फरधान के गांव बौठा गया था। वह पांच मई को रहस्यमय ढंग से लापता हो गया था। दीपक की ससुराल वालों का कहना था कि साला अंशुल दीपक को सुबह दस बजे लखीमपुर स्थित बस अड्डे पर घर जाने के लिए बस में बैठा आया था, लेकिन दीपक शाम तक घर नहीं पहुंचा था। ससुराल वालों ने कोतवाली सदर और दीपक के पिता ने थाना सिंगाही में बेटे की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। दीपक का शव 14 मई को सड़ी गली अवस्था में थाना फूलबेहड़ क्षेत्र में शारदा नदी में मिला था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में गहरी चोट आने से मौत होने की पुष्टि हुई थी। दीपक के पिता राजकिशोर मिश्र ससुरालीजनों पर हत्या का आरोप लगाते हुए थाना फरधान पुलिस को तहरीर दी, लेकिन फरधान पुलिस थाना सिंगाही तो सिंगाही पुलिस थाना फूलबेहड़ में रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कह पीड़ित परिवार को दौड़ाती रही। करीब 16 दिन चक्कर कटवाने के बाद एएसपी अरुण कुमार सिंह के आदेश पर थाना सिंगाही पुलिस ने मृतक की पत्नी, ससुर और दो सालों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी।
पत्नी एकता मिश्रा, ससुर संजीव पांडेय, साला आकाश और अंशुल को बुलाकर भी पूछताछ की। जिसमें चारों आरोपियों ने दीपक को पांच मई की सुबह दस बजे लखीमपुर स्थित बस अड्डे पर बाइक से लाकर बैठाने की बात बताई थी। पुलिस ने जब दीपक के मोबाइल की कॉल डिटेल निकाली तो वह चार मई की रात से ही बंद मिला। उसके बाद उसका मोबाइल नहीं खुला। उसकी आखिरी लोकेशन भी गांव बौठा में थी।
पहले एसआई को सौंपी अब खुद कर रहे जांच
थाना सिंगाही पुलिस दीपक मिश्र हत्याकांड को लेकर शुरुआत से ही ढिलाई बरत रही है। खास बात यह है कि ब्लाइंड मर्डर होने के बाद भी एसओ राजकुमार सरोज ने मामले की जांच एसआई अंसार हुसैन रिजवी को सौंपी थी। जबकि हत्या जैसे गंभीर अपराधों की जांच प्रभारी निरीक्षक या एसओ को करने का नियम हैं। एसआई अंसार अहमद रिजवी ने पीड़ित परिवार के साथ जाकर शव बरामद होने वाले स्थल का नजरी नक्शा बनाया था, लेकिन बाद में एसओ ने जांच वापस ले ली है और वह खुद मामले की जांच कर रहे हैं।
हत्याकांड की अभी जांच चल रही है। चोट को लेकर राज्य चिकित्सा विधि परामर्शदाता लखनऊ से राय मांगी गई थी, लेकिन यह राय अब बेंगलुरु से आएगी। हत्या जैसा मामला है। इसमें जल्दबाजी ठीक नहीं है। रिपोर्ट आने पर ही जांच आगे बढ़ सकेगी—राजकुमार सरोज, एसओ, थाना सिंगाही।
