मुगलिया सल्तनत में इस शिवलिंग को नष्ट करने पर भवरों के झुंड ने फौज पर बोला था हमला….जानें इतिहास
लखनऊ। आदि शिव, अनंत शिव के साथ सावन के दूसरे सोमवार पर शिव भक्तों की भीड़ शिवालयों में उमड़ने लगी है। हर हर महादेव, हे शिव शंभू का उद्घोष कर शिव भक्त जलाभिषेक कर रहे हैं। लखनऊ से करीब 45 किलोमीटर दूर निगोहा क्षेत्र के भंवरेश्वर महादेव मंदिर में भी आस्था का सैलाब दिखाईं पड़ा। …
लखनऊ। आदि शिव, अनंत शिव के साथ सावन के दूसरे सोमवार पर शिव भक्तों की भीड़ शिवालयों में उमड़ने लगी है। हर हर महादेव, हे शिव शंभू का उद्घोष कर शिव भक्त जलाभिषेक कर रहे हैं। लखनऊ से करीब 45 किलोमीटर दूर निगोहा क्षेत्र के भंवरेश्वर महादेव मंदिर में भी आस्था का सैलाब दिखाईं पड़ा। भोर के पहर में मंदिर के कपाट खोल दिए गए। दूरदराज के क्षेत्रों से मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने सई नदी में स्नान कर जलाभिषेक किया। इस दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के काफी इंतजाम किए गए थे लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच आस्था अनूठा संगम देखने को मिला। मंदिर को लेकर पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियां भी हैं।
श्रद्धालुओं कहना है कि मुगलिया सल्तनत के दौरान औरंगजेब की फौज ने सई नदी तट पर डेरा जमाया हुआ था। इसी बीच औरंगजेब की फौज को एक शिवलिंग दिखाई पड़ी। इसके बाद फौज ने उस शिवलिंग को नष्ट करने की कोशिश की लेकिन शिवलिंग के पास भवरो का झुंड निकल पड़ा। इसके बाद इस स्थान को भवरेश्वर महादेव का नाम लिया गया। बता दे सावन महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ गैर जनपदों से भी आती है।

गुरु प्रसाद शुक्ला, श्रद्धालु
इस मंदिर में आज से 50-60 सालों से आ रहा हूं। इस मंदिर के पीछे एक पुरानी कहानी भी है।
श्याम नारायण शुक्ला, श्रद्धालु
अंग्रेजों ने इस मंदिर को तोड़ने की कोशिश की थी। शिवलिंग को तोड़ने के लिए गैंती मारी गई। तो उसमें से भंवरे निकले और
भंवरे उन्हें काटने लगे हैं। तब से इस मंदिर का नाम भवरेश्वर पड़ा।
बाबूलाल अवस्थी, मंदिर कमेटी सदस्य
यह लाट जमीन के अंदर से निकली। औरंगजेब ने इस पर आक्रमण किया था और तोड़ने की कोशिश की थी। तब इसमें से भंवरे निकले। शंकर जी ने भंवरा बन कर फौज को काट कर भगाया था।
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