बरेली: रक्षाबंधन के लिए सज चुके बाजार, मार्केट में आईं मनमोहक राखियां, कीमत 25 रुपये से शुरू
बरेली, अमृत विचार। बाजार में इस बार बड़े ही नहीं बच्चों के लिए भी सुंदर व आकर्षक राखियां बाजार में मौजूद हैं। यह सारी राखियां चाइनीज न होकर भारतीय राखी हैं। व्यापारियों ने चाइनीज राखियों से गुरेज कर भारतीय राखियों को बेचने का निर्णय लिया है। जिस कारण बाजार में केवल देश में निर्मित राखियां …
बरेली, अमृत विचार। बाजार में इस बार बड़े ही नहीं बच्चों के लिए भी सुंदर व आकर्षक राखियां बाजार में मौजूद हैं। यह सारी राखियां चाइनीज न होकर भारतीय राखी हैं। व्यापारियों ने चाइनीज राखियों से गुरेज कर भारतीय राखियों को बेचने का निर्णय लिया है। जिस कारण बाजार में केवल देश में निर्मित राखियां ही बाजार में नजर आ रहीं है। इन मनमोहक राखियों की कीमत 25 रुपये से शुरू होकर 300 रुपये तक है।
राखी का पर्व नजदीक आने को है। दो साल से कोविड के कारण राखियों को बेचने वाले दुकानदारों को इस बार काफी आस है। भाईयों के लिए बहनों को सुंदर-सुंदर राखियां खरीदते देखा जा सकता है। बाजार में अमेरिकन डायमंड, कुंदन, मोरपंखी, जरी इवील आई, आदि शानदार राखियां बाजार में मौजूद हैं। 12 वर्ष से सिविल लाइन मंदिर के सामने राखियां बेचने वाले विशाल तलवार ने बताया इस बार उन्होंने कई नई किस्म की राखियों को मंगाया है।

इस बार उन्होंने चाइनीज राखियों को न मंगाकर देश में बनने वाली राखियां मंगाई हैं। जिसमें बच्चों के लिए कई आकर्षक राखियां भी उनके पास मौजूद हैं। इस बार नई राखियों में अमेरिकन डायमंड, मोरपंखी आदि राखी लोगों को बहुत पसंद आ रहीं है। उनके पास 25 रुपये से शुरू होकर तीन सौ रुपये कीमत की राखी मौजूद है। सिविल लाइन मंदिर के सामने ही राखी बेचने वाले अजय कश्यप ने बताया दो साल से कोविड के कारण धंधा मंदा रहा था। जिस तरह से बाजार में ग्राहक आ रहें हैं।

इससे ऐसा लग रहा है कि व्यापार अच्छा होने की संभावना है। उनके पास बड़ो से लेकर बच्चों के लिए बेहतरीन राखियां हैं। जिसमें बच्चों के लिए डोरीमान, यूनिकान,लाइट वाली राखी आदि बहुत ही आकर्षक हैं। बच्चों को यह राखियां बहुत ही पसंद आ रहीं हैं। जिला अस्पताल रोड पर राखी लगाने वाले राकेश सूरी ने बताया दो साल कोविड महामारी के कारण राखी का व्यापार काफी मंदा रहा। इस बार कोविड महामारी का प्रकोप कम है। उम्मीद है इस बार व्यापार ठीक रहेगा।

दिल्ली, कलकत्ता व जयपुर से आई हैं राखियां
इस बार व्यापारियों ने चाइनीज राखियों का बहिष्कार कर दिया है। मार्केट में देश में बनी राखियां ही मौजूद हैं। यह राखियां दिल्ली, कलकत्ता, व जयपुर से आ रही हैं। कुंदन, मोरपंखी, के साथ ही जरी की राखियां काफी सुंदर और आकर्षक हैं। जरी की राखियां जयपुर से आई हैं। कलकत्ता व दिल्ली से बच्चों के लिए कार्टून वाली राखियों को मंगाया गया है।
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