गोंडा: ट्रांसफर के बाद भी जिलों में जमे अफसरों व कर्मचारियों के खिलाफ हुआ शासन सख्त, मांगी रिपोर्ट

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गोंडा। तबादलारत कर्मियों की रिलीविंग रोकने के मामले में समाज कल्याण विभाग सरकार के निशाने पर आ गया है। जुगाड़ के सहारे अपनी रिलीविंग रोकने में सफल रहे अफसरों और कर्मियों की सूची शासन ने तलब कर ली है। शासन के अनु सचिव ने समाज कल्याण निदेशक को पत्र लिखकर ऐसे अधिकारियों कर्मचारियों का ब्यौरा …

गोंडा। तबादलारत कर्मियों की रिलीविंग रोकने के मामले में समाज कल्याण विभाग सरकार के निशाने पर आ गया है। जुगाड़ के सहारे अपनी रिलीविंग रोकने में सफल रहे अफसरों और कर्मियों की सूची शासन ने तलब कर ली है। शासन के अनु सचिव ने समाज कल्याण निदेशक को पत्र लिखकर ऐसे अधिकारियों कर्मचारियों का ब्यौरा तलब किया है जिन्होंने ट्रांसफर के बावजूद अब तक अपने नवीन तैनाती स्थल पर योगदान नहीं दिया है।

ऐसे लोगों के खिलाफ सरकार कार्रवाई करने की तैयारी में है। अनु सचिव के इस पत्र के बाद जिले के समाज कल्याण महकमें में हड़कंप मचा हुआ है। बुधवार को आनन-फानन में तबादलारत् कई कर्मियों को रिलीव कर दिया गया। समाज कल्याण निदेशालय ने जनहित और प्रशासनिक आधार पर 29 जून को विभाग के कई अफसरों व कर्मचारियों का तबादला किया था।

तबादला होने के बावजूद जिले से इन कर्मियों की रिलीविंग नहीं हो सकी थी। कई जनपदों से इस बात की शिकायत शासन तक पहुंच रही थी कि तबादला पाने वाले अधिकारी या कर्मचारी जोड़-तोड़ के सहारे अपने पुराने तैनाती वाले जिले में ही जमे रहना चाहते हैं। ऐसे में नवीन तैनाती वाले स्थल पर तबादला रद्द कर्मियों का योगदान नहीं हो पा रहा था इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए शासन के अनुसचिव ने समाज कल्याण निदेशक को पत्र जारी कर ऐसे कर्मियों का ब्यौरा तलब किया है जिनका तबादला होने के बावजूद वह अपने पुराने जनपदों में जमे हुए हैं।

अनुसचिव ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि समूह ख, ग और घ के स्थानांतरित होने वाले कर्मचारी यदि कार्यमुक्त नहीं होते हैं तो निदेशालय स्तर से उन्हें स्वत: कार्यमुक्त माना जाएगा। स्वत: कार्यमुक्त होने की दशा में संबंधित जनपद से उनका वेतन आहरण नहीं हो सकेगा। इसके अलावा तबादले के तिथि से कार्यमुक्त होने की तिथि तक की अवधि को अवैतनिक अवकाश मान लिया जाएगा और उसे सेवा से हटा दिया जाएगा।

तबादले के बावजूद डटे हैं प्रभारी प्रधानाचार्य

अनु सचिव के इस पत्र के बाद जिले के समाज कल्याण महकमे में भी खलबली है। 29 जून को हुए तबादले में जिले के 5 कर्मियों का ट्रांसफर हुआ था जिसमें से वरिष्ठ लिपिक गोकुल प्रसाद, कनिष्ठ लिपिक हनुमान प्रसाद, सहायक विकास अधिकारी रामकरन व मो आलम तथा राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय सकरौरा में कार्यरत इतिहास के प्रवक्ता व प्रभारी प्रधानाचार्य राधेश्याम चौधरी शामिल थे। इनमें से गोकुल प्रसाद व हनुमान प्रसाद को पहले ही रिलीव किया जा चुका है।

जबकि रामकरन व मोहम्मद आलम को बुधवार को रिलीव कर दिया गया लेकिन प्रभारी प्रधानाचार्य राधेश्याम चौधरी को अब तक रिलीव नहीं किया गया है। तबादला होने के बावजूद वह अपने पद पर डटे हुए हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी राधेश्याम चौधरी का कहना है कि प्रशासनिक कार्यों के चलते उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है।

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