हल्द्वानी: सेंट्रल मेथोडिस्ट चर्च के पादरी संजय जॉन राम का निधन, यूपी के बदायूं के रहने वाले थे

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हल्द्वानी, अमृत विचार। खाना खाते वक्त चर्च के पादरी के गले में निवाला अटक गया। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इस मामले में परिजनों ने किसी तरह का कोई आरोप नहीं लगाया है। मूलरूप …

हल्द्वानी, अमृत विचार। खाना खाते वक्त चर्च के पादरी के गले में निवाला अटक गया। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। इस मामले में परिजनों ने किसी तरह का कोई आरोप नहीं लगाया है।

पादरी संजय जॉन राम (फाइल फोटो)

मूलरूप से बदायूं उत्तर प्रदेश निवासी संजय जॉन राम (50) नैनीताल रोड स्थित सेंट्रल मैथोडिस्ट चर्च में पादरी थे। उनकी पत्नी मंजू जॉन राम अपनी बेटी अशिका व बेटे एनॉस के साथ बदायूं में ही रहती है और बदायू के जिला अस्पताल में बतौर स्टाफ नर्स काम करती हैं। बताया जाता है कि शुक्रवार रात करीब 11 बजे पादरी संजय अपने कमरे में बैठे खाना खा रहे थे, तभी खाने का एक निवाला उनके गले में अटक गया। कुछ ही देर में उनकी हालत बिगड़ गई और नाक से खून निकलना शुरू हो गया। किसी तरह वह अपने कमरे से बाहर निकले और पड़ोसी का दरवाजा खटखटाया। पादरी का हालत देख कर चर्च में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पड़ोसी उन्हें बेस अस्पताल ले गए, लेकिन उनका ब्लड प्रेशर काफी कम हो चुका था और हालत नाजुक हो चुकी थी। जिसके चलते उन्हें सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय रेफर कर दिया गया।

हालांकि अस्पताल पहुंचने में देर हो गई। एसटीएच में चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मॉर्चरी भेज दिया। शनिवार को पादरी संजय की पत्नी मंजू जॉन अपने बच्चों के साथ हल्द्वानी पहुंची। उन्होंने चर्च में लगे सीसीटीवी फुटेज देखे। उन्होंने भी मौत की वजह गले में निवाला अटकने को बताई।

कीमोथैरेपी से सिकुड़ गई थी गले की नली
मंजू जॉन ने बताया कि वर्ष 2006 में पादरी जॉन को कैंसर हो गया था, जिसका लगातार इलाज चल रहा था। उनकी कीमोथैरेपी भी कराई गई थी। जिसकी वजह से उनके गले की नलियां सिकुड़ गई थीं और इसकी वजह से उन्हें खाना खाने में दिक्कत होती थी। खाना गले के नीचे ठीक से उतर जाए, इसके लिए वह साथ में केले खाते थे और पानी की बोतल हर वक्त अपने साथ रखते थे।

अपनी पत्नी से अलग रहते थे पादरी
पादरी की पत्नी मंजू जॉन की मानें तो पादरी संजय पिछले करीब 12 सालों से नैनीताल रोड स्थित चर्च में रह रहे थे। वहीं पोस्टमार्टम पहुंचे एक रिश्तेदार ने बताया कि पादरी संजय अपनी पत्नी से अलग हो चुके थे और यहां चर्च में अकेले ही रहते थे। यह बात अपुष्ट है, लेकिन बताया जा रहा है कि उनका अपनी पत्नी से तलाक भी हो चुका था।

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