बरेली: ऊंचा गांव में सैलाब के चलते आधा गांव कर चुका है पलायन
बरेली, अमृत विचार। सैलाब के कारण ऊंचा गांव के आधे से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर अन्य जगह बस गए हैं। गांव के लोगों की मानें तो सैलाब में उनकी फसलें भी पूरी तरफ तबाह हो जाती हैं। जिस कारण वह लोग गांव छोड़ने को मजबूर हुए। फिलहाल दो साल से बरसात कम होने …
बरेली, अमृत विचार। सैलाब के कारण ऊंचा गांव के आधे से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर अन्य जगह बस गए हैं। गांव के लोगों की मानें तो सैलाब में उनकी फसलें भी पूरी तरफ तबाह हो जाती हैं। जिस कारण वह लोग गांव छोड़ने को मजबूर हुए। फिलहाल दो साल से बरसात कम होने के कारण गांव में बाढ़ नहीं आई है। मदद के नाम पर प्रशासन ने गांव के लोगों को आश्वासन के सिवा कुछ नहीं दिया।
ऊंचा गांव के रहने वाले ब्रजेश पलेट ने बताया गांव में बाढ़ के कारण लोगों को काफी परेशानी होती है। जल स्तर बढ़ने से गर्मी के मौसम में होने वाली फसल पूरी तरह नष्ट हो जाती है। जिस कारण किसान को काफी हताशा होने लगी। करीब आधा गांव बाढ़ के कारण पलायन कर गया। खेतों में तो बाढ़ का पानी भरता ही था। गांव में भरने से रोटी खाने तक के लाले पड़ जाते थे। फिलहाल दो साल से बाढ़ न आने से गांव के लोगों को काफी राहत मिली है।

सरकार का आश्वासन केवल कागजों तक सिमटा
सरकार ने गांव में जब-जब बाढ़ आई, तब से प्रशासन ने गांव के लोगों की मदद के लिए आश्वासन दिया था। लेकिन उन्हें कभी भी मुआवजा नहीं मिला। जिस कारण वह हताश हैं।यही बजह रही की आधा गांव बाढ़ के डर से चला गया। अब वह शहर या अन्य जगह मजदूरी या अन्य काम कर रहा है। अगर सरकार ने गांव में किसानों की मदद की होती और उन्हें आर्थिक सहायता देती तो लोग गांव छोड़ने को मजबूर नहीं होते।
गांव में खाली पढ़े मकान बने खंडहर
गांव से लोगों के पलायन करने से उनके मकान अब खंडहर में तब्दील हो गए हैं। कई मकान इस बात की गवाही दे रहें है। जो लोग इस समय गांव में रह रहें हैं। वह बुरे हालात से लड़कर अपना गुजारा कर रहें हैं। जब भी बाढ़ आती है तो किसानों को सरकार से आस रहती है, कि शायद सरकार उनकी कुछ मदद करे।
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