…तब अगस्त क्रांति में अंग्रेजों के विरुद्ध सुलग उठा था मुरादाबाद
आशुतोष मिश्र, अमृत विचार। नौ अगस्त का (1942 की क्रांति) दूसरा दिन मुरादाबाद में बड़े विरोध के रूप में दर्ज है। कांग्रेस की मुंबई के बाद यह लोग अंग्रेजों के विरुद्ध एकत्र हो गए। 10 अगस्त को यहां पर क्रांति की ज्वाला धधक पड़ी। इतिहास के पन्नों में जिले में उससे जुड़ी कई घटनाएंदर्ज है। …
आशुतोष मिश्र, अमृत विचार। नौ अगस्त का (1942 की क्रांति) दूसरा दिन मुरादाबाद में बड़े विरोध के रूप में दर्ज है। कांग्रेस की मुंबई के बाद यह लोग अंग्रेजों के विरुद्ध एकत्र हो गए। 10 अगस्त को यहां पर क्रांति की ज्वाला धधक पड़ी। इतिहास के पन्नों में जिले में उससे जुड़ी कई घटनाएंदर्ज है।
अंग्रेजों से मोर्चा
- चौधरी हरिवंश ने धामपुर थाने पर किया था कब्जा, शहर में राधेश्याम अग्रवाल ने संभाली थी आंदाेलन की कमान, थाना छोड़ भागे थे अंग्रेज
- विरोध प्रदर्शन के दौरान पान दरीबा क्षेत्र में जगदीश प्रसाद अंग्रेज पुलिस की गोली से हो गए थे शहीद, फूट पड़ा था लोगों का गुस्सा
मुंबई में अंग्रेजों विरोध की बैठक का मसौदा यहां बड़े विरोध के रूप में सामने आया। तब ठाकुरद्वारा क्षेत्र के रामपुर घोघर निवासी चौधरी हरबंश सिंह ने देहात में अंग्रजों के विरोध की विशाल जलाई। उन्होंने धामपुर (जनपद बिजनौर) थाने की दीवार पर प्रतिरोध का पोस्टर लगा दिया। यह चेतावनी दे डाली कि 24 घंटे के भीतर अंग्रेजी पुलिस थाना खाली कर दे। उस चेतावनी का असर दिखा। ब्रिटानी पुलिस थाना छोड़कर भाग गई।

तब जिला मुख्यालय पर राजकीय इंटरमीडिएट कालेज से लेकर टाउन हॉल के बीच में ही पूरा शहर था। 10 अगस्त को शहर के लोग अंग्रेजी शासन के खिलाफ सड़क पर निकल पड़े। तब एडवोकेट राममोहन अग्रवाल ने जुलूस की कमान संभाली। राजकीय इंटरमीडिएट कालेज से निकला जुलूस टाउन हॉल तक पहुंचना था। लेकिन, पान का दरीबा क्षेत्र में अंग्रेजी पुलिस में जुलूस को घेर लिया। दोनों तरफ से हंगामा होने लगा। इसमें अंग्रेजी पुलिस की गोली जगदीश प्रसाद को लग गई।
शहर के जीलाल मोहल्ला निवासी जगदीश प्रसाद की शहादत से लोगों का गुस्सा भड़क उठा। लोग अंग्रेजी शासन के खिलाफ उग्र हो गए। भीड़ रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ गयी और टिकट घर लूट लिया। इसके बाद टाउन हॉल में सभा हुई। विरोध-प्रदर्शन में राधेश्याम अग्रवाल, जगदीश शरण अग्रवाल मुख्य रूप से शामिल हुए। राधेश्याम अग्रवाल तख्तवाली मस्जिद क्षेत्र में रहते थे। जबकि विरोध प्रदर्शन में शामिल उनके भतीजे जगदीश शरण अग्रवाल को पकड़ने के लिए पुलिस ने घर की घेराबंदी कर दी। तब जगदीश शरण का परिवार गुलाल गली में रहता था। वहां पुलिस पहुंची, लेकिन जगदीश शरण को पकड़ने में सफल नहीं हो पाई। यानी कि मुरादाबाद शहर अगस्त क्रांति के विस्फोट का बड़ा केंद्र बन गया। बाद में आंदोलन की अगुवाई करने वाले राधेश्याम अग्रवाल को सेनानी का प्रमाण पत्र मिला। इंदिरा गांधी के हाथों यह प्रमाण पत्र उन्हें सौंपा गया।
इतिहासकार डॉ.अजय अनुपम का कहना है कि मुरादाबाद के सेनानी नाम की पुस्तक तैयार हो चुकी है। इसका प्रकाशन जल्द होना है, जिसमें अगस्त क्रांति की घटनाओं का उल्लेख है। संग्रह में सेनानी राधेश्याम अग्रवाल, चौधरी हरिवंश सिंह और शहीद जगदीश प्रसाद की चर्चा है। आजादी की लड़ाई में लोगों का सहयोग मांगने यहां तीन बार महात्मा गंधी आए थे। जबकि अगस्त क्रांति की ज्वाला यहां तेजी से धधकी थी।
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