लखनऊ : लखनऊ यूनिवर्सिटी को मिली बड़ी जिम्मेदारी, जानिये कैसे दो राज्यों में शिक्षा का बनाएगा नया स्तर

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लखनऊ, अमृत विचार । नैक से ए डबल प्लस मिलने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही है। अब विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की ओर से नई शिक्षा नीति को लेकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। लखनऊ विश्वविद्यालय को अब उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड के सभी विश्वविद्यालयों …

लखनऊ, अमृत विचार । नैक से ए डबल प्लस मिलने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही है। अब विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की ओर से नई शिक्षा नीति को लेकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। लखनऊ विश्वविद्यालय को अब उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड के सभी विश्वविद्यालयों में पूर्ण में रूप से नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम व पाठ्यचर्चा की रूप रेखा तैयार करने का उत्तर दयित्व सौंपा गया है।

इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया गया है। बता दें कि नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला देश भर में सबसे पहला उच्च शिक्षण संस्थान लखनऊ विश्वविद्यालय बना था। कड़ी चुनौतियों के बीच कुलपति प्रोफेसर आलोक राय ने जिस तरह इसे एक चैलेंज के रूप में लिया उसको काफी हद तक जमीनी स्तर पर अंजाम तक भी पहुंचाया। इस बात की चर्चा भी देश भर में हुई थी। अब अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी प्रोफेसल आलोक राय को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से नागरिक समाज समूहों के साथ नई शिक्षा नीति लेकर कार्यशालाओं का आयोजन कराना होगा। कार्यशाला में पांच कुलपति शामिल होंगे। जो इस बात पर चर्चा करेंगे कि नई शिक्षा नीति के तहत कैसे पाठयक्रम होंगे और कैसे हर दिन पढ़ाई का शेड्यूल होगा। विश्वविद्यालय के यह एक महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है और इसी कड़ी में कल लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग में एक विमर्श कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में पांच विश्वविद्यालयों के कुलपति, अनेक शैक्षिक एवं अनुसंधान संस्थायें, विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थायें, उच्च अध्ययन शिक्षा संस्थानों के प्रधानाचार्य इत्यादि प्रतिभाग कर रहे हैं।

एकदिवसीय गहन विचार विमर्श के पश्चात जो सुझाव प्राप्त होंगे उन्हें एन.सी.इ.आर.टी. को प्रेषित किया जायेगा, ताकि उसके अनुरूप विद्यालयी पाठ्यक्रम की रुपरेखा तैयार की जा सके। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यशाला है जिसमें विद्यालयी शिक्षा से जुड़े सभी लोग अपनी-अपनी अपेक्षाओं, शिक्षा में सुधार हेतु अपने सुझाव प्रस्तुत करेंगे ताकि नई शिक्षा नीति-2020 का अनुपालन सही प्रकार से सुनिश्चित किया जा सकें।

यह भी पढ़ें –लखनऊ : अखिलेश के बाद मायावती ने भी किया ‘हर घर तिरंगा’ का समर्थन

संबंधित समाचार