पिता की अमानत बेटे ने सहज कर रखी, इंदौर के राजा से खरीद कर बरेली आई थी एरिसकिने सिक्स कार

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बरेली, अमृत विचार। देश की आजादी से पहले की कार बरेली में मौजूद है। इस कार को रिटायर्ड आर्मी मैन ने 1965 में खरीदा था। जिसे आज भी उनके दवा व्यापारी बेटे सहेजे हुए हैं। बताया जाता है यह कार 1926 में हिंदुस्तान में इंदौर के राजा ने मंगाई थी। जिसके बाद इसको देहरादून के …

बरेली, अमृत विचार। देश की आजादी से पहले की कार बरेली में मौजूद है। इस कार को रिटायर्ड आर्मी मैन ने 1965 में खरीदा था। जिसे आज भी उनके दवा व्यापारी बेटे सहेजे हुए हैं। बताया जाता है यह कार 1926 में हिंदुस्तान में इंदौर के राजा ने मंगाई थी। जिसके बाद इसको देहरादून के दोशवहाए नाम के पारसी युवक ने खरीदा था। बरेली में स्वराज जी रुस्तम कार को बरेली लाए थे। उसके बाद कार को सैयद कादर अली ने खरीद लिया।

उनके बाद कार को बरेली की गंगा नगर कॉलोनी निवासी दवा व्यपारी राजेश साहनी के पिता रिटायर्ड आर्मी मैन ने सैयद कादिर अली स्व सन 1965 में खरीदी थी। पिता जी के बाद उन्होंने इस धरोहर को सहज के रखा है। आज राजेश साहनी अपने बच्चे, बाप और बेटी आराध्या के साथ आजादी के अमृत महोत्सव पर इस गाड़ी को लेकर सड़क पर निकल पड़े। गाड़ी सड़क पर निकलते ही इसको देखने के लिए लोगों को भीड़ उमड़ पड़ी।

ये कार दिल्ली से लेकर लखनऊ में हुई रेस में ले चुकी है हिस्सा
राजेश साहनी ने बताया उनके पिता ने यह कार शौक के तौर पर खरीदी थी। लेकिन अब कार की बदौलत उनकी अलग पहचान बन गई। पिता रिटायर्ड होने के बाद शहर में कार सिखाने का ट्रेनिंग सेंटर चलाने लगे। उनकी यह कार कई बार लखनऊ व दिल्ली में प्रदर्शनी व रेसिंग कंपटीशन जीत चुकी है।

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