बरेली: कैसे पता चले दवा असरदार, 60 दिन से रिपोर्ट का इंतजार
बरेली, अमृत विचार। जिले के लोग मानकों की कसौटी पर खरी दवाइयों का ही सेवन कर रहे हैं। दवा असरदार है या नहीं, इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। महीनों गुजर जाने के बाद भी दवाइयों के भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट नहीं आने से ऐसे सवाल खड़े होने लाजिमी हैं। कई दवाओं की …
बरेली, अमृत विचार। जिले के लोग मानकों की कसौटी पर खरी दवाइयों का ही सेवन कर रहे हैं। दवा असरदार है या नहीं, इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। महीनों गुजर जाने के बाद भी दवाइयों के भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट नहीं आने से ऐसे सवाल खड़े होने लाजिमी हैं। कई दवाओं की रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। उसके आने के बाद ही सच्चाई का पता चल सकेगा।
बरेली जिले में दवा का बड़ा कारोबार है। हजारों की संख्या में मेडिकल स्टोर्स हैं। जानकारों की माने तो मेडिकल स्टोर्स की नियमित जांचें नहीं हो पाती हैं। ड्रग विभाग की ओर से करीब दो माह पहले जिले से 50 से अधिक दवाओं के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए थे, लेकिन इतना लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी अभी किसी भी दवाओं के सैंपल की रिपोर्ट नहीं आ सकी है। विभाग को फिलहाल रिपोर्ट आने का इंतजार है।
सार्वजनिक नहीं होती है रिपोर्ट
दवाओं के सैंपल लेकर विभाग भले ही जांच के लिए भेज देता है। सूत्रों के अनुसार लंबे अंतराल के बाद जब रिपोर्ट आती है तो विभाग उसे सार्वजनिक नहीं करता है। ऐसे में आम लोगों को इस बात की भनक भी नहीं लगती है कि जिस दवा का वह सेवन कर रहे थे, वह असरदार है या नहीं। ऐसे में इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है।
ड्रग इंस्पेक्टरों की है कमी
जिले में ड्रग इंस्पेक्टरों की कमी है, इसकी वजह से भी कार्यों में तेजी नहीं आ पाती है। मंडल के जिलों में दो और छोटे जिलों में एक ड्रग इंस्पेक्टर की तैनाती शासन की ओर से की गई है। हालांकि, इनकी कमी को लेकर कमेटी की ओर से मांग की जा चुकी है। कमी के बावजूद एक ड्रग इंस्पेक्टर विवेक कुमार बदायूं जिले का भी चार्ज संभाल रहे हैं। इसके अलावा इंस्पेक्टरों के पास नए लाइसेंस बनाना, पुराने लाइसेंसों का नवीनीकरण से लेकर विभागीय कार्य भी होते हैं। अफसर भी दबी जुबान कमी की वजह से विभागीय कार्यों में देरी की बात को स्वीकार कर रहे हैं। हालांकि, वह खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं।
सैंपल में यह होती हैं जांचें
ड्रग विभाग की ओर से दवाओं के सैंपल लिए जाते हैं, जिसमें यह जांचा जाता है कि रैपर पर जो लिखा वह मानकों की कसौटी पर सही है या नहीं । यह भी जांच की जाती है कि जिस कंपनी की दवा है, उसके पास इस दवा को बनाने का लाइसेंस है या नहीं। विभाग ने एंटीबॉयोटिक, कफ शीरफ, दर्द निवारक समेत 50 दवाओं के सैंपल जांच को भेजे हैं।
दो माह पहले 40 से 50 दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे थे, जिनकी अभी रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने में देरी हो जाती है। फिलहाल, रिपोर्ट के आने का इंतजार किया जा रहा है—विवेक कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर।
यह भी पढ़ें- बरेली: खाद्य सामग्री में मिलावट करना पड़ेगा भारी, लगेगा लाखों का जुर्माना
