हल्द्वानी: न लाइसेंस, न शुल्क और धड़ल्ले चल रहा लकड़ी कारोबार… ऐसे चलता है ‘खेल’
हल्द्वानी, अमृत विचार। न लाइसेंस, न शुल्क और हल्द्वानी में धड़ल्ले से लकड़ी के कारोबार चल रहे हैं। नियमों को ताक पर रखते हुए अधिकारी कारोबारी हर रोज मंडी को चूना लगाने का काम कर रहे हैं। पिछले आठ महीने से लगातार अवैध रूप से यह कारोबार चल रहा है। बिना शुल्क जमा किए और …
हल्द्वानी, अमृत विचार। न लाइसेंस, न शुल्क और हल्द्वानी में धड़ल्ले से लकड़ी के कारोबार चल रहे हैं। नियमों को ताक पर रखते हुए अधिकारी कारोबारी हर रोज मंडी को चूना लगाने का काम कर रहे हैं।
पिछले आठ महीने से लगातार अवैध रूप से यह कारोबार चल रहा है। बिना शुल्क जमा किए और लाइसेंस के बगैर चल रहे इस कारोबार के माध्यम से लकड़ी हल्द्वानी के बाहर भी बेची जा रही है और मंडी अधिकारियों को इसकी कानोकान खबर तक नहीं हो रही है। कभी कभार, सूचना मिल भी जाए तो चालान कार्रवाई के बाद अधिकारी शांत हो जाते हैं।
मंडी अधिकारियों के अनुसार हल्द्वानी मंडी क्षेत्रान्तर्गत लकड़ी का कारोबार करने वाले व्यापारियों की संख्या करीब 60 से 70 बताई जाती है। वर्ष 2021 के 20 दिसंबर को शासन ने जीओ जारी करते हुए सभी लकड़ी कारोबारियों को लाइसेंस लेना जरूरी बताया था। मंडी समिति को मंडी परिसर के बाहर लकड़ी का कारोबार करने वाले व्यापारियों के लाइसेंस के नवीनीकरण या फिर दोबारा बनाए जाने के निर्देश जारी किए गए थे। बावजूद इसके मंडी के क्षेत्रांतर्गत अधिकांश कारोबारी बिना लाइसेंस और शुल्क की चोरी कर यह कारोबार कर रहे हैं।
एपीएलएम एक्ट से लाइसेंस के दायरे से हो गए थे बाहर
कोरोना काल में वर्ष 2020 में एग्रीकल्चर प्रोड्यूस एंड लाइवस्टॉक मार्केटिंग (एपीएलएम) के लागू होने के बाद मंडी परिसर के बाहर लकड़ी का कारोबार करने वाले व्यापारियों को लाइसेंस लेने की व्यवस्था से मुक्त कर दिया गया था। दो साल बाद पिछले साल 20 दिसंबर से फिर से इसे लागू कर दिया गया।
60 फीसदी तक घट गया कारोबार
जबसे मकानों व अन्य निर्माण में लोहा व स्टील का प्रयोग बढ़ गया है, लकड़ी के कारोबार में बड़ी गिरावट हुई है। छोटी दुकानों के अलावा बहुत कम ही रिसॉर्ट व होटल में लकड़ी का प्रयोग रह गया है। कारोबारियों की माने तो इस वजह से 60 फीसदी तक कारोबार घट गया है।
पुरानी व्यवस्था चाहते हैं कारोबारी
मंडी निरीक्षक भुवन गोस्वामी लकड़ी कारोबारियों को लाइसेंस लेने के बाद लकड़ी बेचने पर कीमत के अनुसार 2.5 (ढाई) फीसदी (सौ रुपये में ढाई रुपये) शुल्क देना होता है। मंडी सचिव के अनुसार पुरानी व्यवस्था में वन निगम ही 10 फीसदी शुल्क वसूल लेता था और मंडी को उसका शुल्क भिजवा देता था। इसे कारोबारी को भटकना नहीं पड़ता था। फिलहाल यह व्यवस्था चालू नहीं हो सकी है। ढाई फीसदी मंडी को कर देना जरूरी है। लकड़ी कारोबारी उसी पुरानी व्यवस्था को लागू करने की मांग कर रहे हैं।
हल्द्वानी मंडी क्षेत्रांतर्गत लकड़ी कारोबारियों को लाइसेंस लेना जरूरी है। अधिकांश ने अभी इसके लिए आवेदन नहीं किया है। ऐसे कारोबारियों पर कार्रवाई हो रही है। लाइसेंस व मंडी संबंधित कोई कागजात नहीं मिलने पर तीन कारोबारियों से शमन व मंडी शुल्क और विकास सेस वसूला जा चुका है। कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। – दिग्विजय सिंह देव, सचिव, मंडी समिति
