बरेली: सूखे की गहरा रही आशंका, चार बिंदुओं पर आकलन करने में जुटा विभाग
बरेली, अमृत विचार। अगस्त का महीना समाप्त होने वाले हैं। आमताैर पर जुलाई-अगस्त के महीने में ठीक-ठाक बारिश होती है, लेकिन पिछले साल की अपेक्षा इस बार जुलाई और अगस्त के महीनों में बारिश काफी कम हुई है। यही वजह है कि अब शासन ने भी मौसम का रुख देखते हुए पत्र जारी कर चार …
बरेली, अमृत विचार। अगस्त का महीना समाप्त होने वाले हैं। आमताैर पर जुलाई-अगस्त के महीने में ठीक-ठाक बारिश होती है, लेकिन पिछले साल की अपेक्षा इस बार जुलाई और अगस्त के महीनों में बारिश काफी कम हुई है। यही वजह है कि अब शासन ने भी मौसम का रुख देखते हुए पत्र जारी कर चार बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। अब मांगे गए बिंदुओं पर एडीएम ने आकलन कराना शुरू कर दिया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार जुलाई और अगस्त के महीनों में सबसे अधिक बारिश होती है। किसानों को इन महीनों में बारिश होने का काफी इंतजार रहता है। मानसून की बारिश से फसलों को काफी फायदा होता है। खासकर गन्ना और धान की फसलों के लिए बारिश की बूंदें अमृत समान होती हैं, लेकिन इस बार मौसम की बेरुखी ने किसानों के चेहरे पर मायूसी ला दी है। जून से मानसून की शुरुआत हो जाती है, लेकिन जून, जुलाई का महीना निकल गया है।
औसत के हिसाब से बारिश नहीं हुई है। नजारत दफ्तर से मिले आंकड़ों के अनुसार, 2021 की अपेक्षा इस बार जुलाई में 1797 मिलीमीटर कम बारिश होनी दर्ज की गई है। इस साल अगस्त के महीने में अभी तक 550 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि पिछले साल 1216.6 मिलीमीटर बारिश हुई थी।
उधर, बारिश न होने की वजह से किसानों के माथे पर लगातार चिंता की लकीरें गहरा रही हैं। सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। इसको देखते हुए शासन भी गंभीर नजर आ रहा है। 20 अगस्त को शासन की ओर प्रशासन को आदेश पत्र भेजकर चार बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। शासन के पत्र के बाद एडीएम एफआर संतोष बहादुर सिंह ने बिंदुओं पर आकलन कराना शुरू कर दिया है।
15 अक्टूबर तक रहता है मानसून
मानसून बारिश का समय करीब चार महीनों का होता है। 15 जून से लेकर 15 अक्टूबर तक मानसून का समय रहता है। ऐसे में अभी करीब दो माह मानसून का समय है।
बोआई पिछड़ी, फसलें भी प्रभावित
मानसून की बेरुखी से इस बार बोआई से लेकर फसलें तक प्रभावित हुई हैं। बारिश के इंतजार में किसान लंबे समय तक बादलों की ओर टकटकी लगाए रहे, लेकिन बारिश नहीं हुई तो निजी संसाधनों का किसानों ने सहारा लिया, लेकिन अब समय से सिंचाई के अभाव में फसलें प्रभावित हो रही हैं।
इन बिंदुओं पर मांगी गई रिपोर्ट
शासन की ओर से भेजे गए पत्र में चार बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है, जिसमें जिले में कितनी जमीन खाली पड़ी है। कितने हेक्टेयर में फसल बोई गई है इस बार, कितनी फसल सिंचित है, कितनी असंचित जमीन (जहां सिंचाई का कोई साधन) नहीं है।
20 अगस्त को शासन का पत्र आया है। चार बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। उसका आकलन कराया जा रहा है। रिपोर्ट तैयार कर शासन को जल्द भेजी जाएगी—संतोष बहादुर सिंह, एडीएम एफआर।
यह भी पढ़ें- बरेली: शहर में बिजली चोरी के खिलाफ अभियान, 22 पर रिपोर्ट दर्ज
