floods in pakistan: पाकिस्तान ने अघोषित आपातकाल से निपटने के लिए मांगी वैश्विक सहायता
इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने बाढ़ प्रभावित लोगों के राहत एवं पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक वीडियो संदेश में कहा कि मौजूदा राहत अभियान में 80 अरब रुपये की जरूरत है और नुकसान से उबरने के साथ-साथ पीड़ितों के …
इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने बाढ़ प्रभावित लोगों के राहत एवं पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक वीडियो संदेश में कहा कि मौजूदा राहत अभियान में 80 अरब रुपये की जरूरत है और नुकसान से उबरने के साथ-साथ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए भी सैकड़ों अरबों रुपये की जरूरत है।
पाकिस्तान में जुलाई से अब तक आई भारी बाढ़ में कम से कम 830 लोगों की जान जा चुकी है, ऐसे में सरकार ने मंगलवार को एक अंतरराष्ट्रीय अपील शुरू करने का फैसला किया जिसमें बाढ़ प्रभावित लोगों के राहत एवं पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए धन की मांग की गई। समाचारपत्र ‘डान’ की बुधवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक यह निर्णय राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा पाकिस्तान में बाढ़ आपातकाल पर तत्काल ब्रीफिंग के दौरान किया गया, जिसे बाढ़ से हुए नुकसान का पुनर्मूल्यांकन करने और विकास भागीदारों तथा दानदाताओं को संकट की भयावहता से अवगत कराने के लिए बुलाया गया था।
असामान्य मानसूनी बारिश के कारण हुई तबाही को कम करने के लिए सहायता के लिए बाहर की ओर देखने के अलावा प्रधानमंत्री ने राष्ट्र से बाढ़ पीड़ित लोगों की मदद करने की भी अपील की क्योंकि सरकार को बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए सैकड़ों अरबों रुपयों की आवश्यकता है।
योजना मंत्री अहसान इकबाल ने की बैठक
योजना मंत्री अहसान इकबाल की अध्यक्षता में एनडीएमए की बैठक में भाग लेने वालों को बताया गया कि अब तक बाढ़ ने 830 लोगों की जान ले ली है तथा कम से कम 1,348 घायल हो गए हैं और देश भर में हजारों लोग बेघर हो गए हैं। बैठक के दौरान योजना मंत्री ने बलूचिस्तान और सिंध की सरकारों से कहा – जो कि दो सबसे अधिक प्रभावित प्रांत हैं – आपदा से निपटने में मदद के लिए औपचारिक रूप से सेना की मांग की जाय। जलवायु परिवर्तन मंत्री शेरी रहमान ने बैठक में बोलते हुए विनाशकारी बाढ़ के मद्देनजर तत्काल मानवीय और बचाव प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने स्वीकार किया कि पाकिस्तान अपने दम पर स्थिति का सामना करने में सक्षम नहीं है।
रहमान ने कहा कि अभी हम मूसलाधार मानसून के सातवें दौर में हैं, जिसमें हजारों लोग बेघर हो गए हैं, 830 लोग मारे गए हैं और 1,348 घायल हो गए हैं। बलूचिस्तान से, मानसून प्रणाली सिंध में चली गई है जहां 30 जिले पानी के नीचे हैं। इसकी भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिंध में 395 फीसदी से ज्यादा और बलूचिस्तान में 379 फीसदी से ज्यादा बारिश हुई है, जो औसत से ज्यादा है।” सीनेटर ने मौजूदा आपदा की तुलना 2010 के भीषण बाढ़ से की, जिसने पाकिस्तान में तबाही मचाई थी और कहा कि सिंध के कम से कम 30 जिले, लगभग पूरा बलूचिस्तान और दक्षिण पंजाब एक अभूतपूर्व मानवीय आपदा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “लोग भटक रहे हैं, पशुधन और फसलों को नुकसान हुआ है।
यह अभूतपूर्व मानसून अनुपात की मानवीय आपदा है।” उन्होंने कहा कि अनुमानित 15,00,000 मिट्टी के घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं और सिंध में 1,989, 868 एकड़ में खेती की गई फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। इस बीच यूरोपीय संघ महत्वपूर्ण मानवीय सहायता के लिए 7.6 करोड़ रुपये प्रदान करने पर सहमत हुआ, जो झाल मैगसी और लासबेला के कुछ सबसे गंभीर रूप से प्रभावित जिलों में सबसे अधिक प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
