अक्षर विहार तालाब की भूमि बेचने की फाइल दबाई, लटकी तलवार

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बरेली, राकेश शर्मा। पट्टे की भूमि के साथ अक्षर विहार तालाब की भूमि को फ्री होल्ड कराकर बेचने के चर्चित मामले में जल्द कार्रवाई होने की बात सामने आई है। नजूल भूमि बेचने की हेराफेरी का मामला वर्ष 2016 में भी चर्चा में रहा। तब अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) के पद पर तैनात रहे अरुण कुमार …

बरेली, राकेश शर्मा। पट्टे की भूमि के साथ अक्षर विहार तालाब की भूमि को फ्री होल्ड कराकर बेचने के चर्चित मामले में जल्द कार्रवाई होने की बात सामने आई है। नजूल भूमि बेचने की हेराफेरी का मामला वर्ष 2016 में भी चर्चा में रहा। तब अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) के पद पर तैनात रहे अरुण कुमार (वर्तमान में अपर आयुक्त बरेली) ने मामला पकड़ा और प्रकरण में जांच की थी। जिम्मेदारों पर आरोप तय किए थे लेकिन फाइल दबा दी गई।

नजूल भूमि का पटल देखने से संबंधित तीन बाबुओं पर जांच रिपोर्ट की फाइल दबाने का आरोप लगा है। इसमें एक बाबू पर भूमि बेचने के दौरान साजिश में शामिल होने का भी शक है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) मनोज कुमार पांडेय की ओर से तीनों को नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे उस रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं होने के संबंध में जवाब-तलब किया गया है। बताते हैं कि तीनों के खिलाफ कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

हालांकि, कमिश्नर रणवीर प्रसाद के निर्शदे पर प्रकरण की दोबारा से जांच कराई जा रही है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व, एसडीएम सदर, अपर नगर आयुक्त व तहसीलदार की संयुक्त कमेटी जांच कर रही है। 22 मार्च के बाद से कोरोना संक्रमण में लाकडाउन लागू होने की वजह से जांच प्रभावित हुई है, लेकिन इसमें कागजी कार्रवाई चलती रही। जांच कमेटी के अधिकारी प्रकरण से जुड़े सूबूत एकत्र करते रहे।

बता दें कि 26 फरवरी को कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने कलेक्ट्रेट का वार्षिक मुआयना किया। निरीक्षण के दौरान नजूल भूमि के प्रकरणों की फाइलें देखने के दौरान अक्षर विहार तालाब की भूमि का मामला सामने आया था। उन्हीं के निर्देश पर जिलाधिकारी ने जांच बैठाई है।

जांच कमेटी की इसी सप्ताह अहम बैठक
नजूल भूमि प्रभारी/अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि लाकडाउन में जांच प्रभावित होने से अब जांच तेजी से कराई जा रही है। मई के अंतिम सप्ताह जांच कमेटी के पदाधिकारियों की बैठक होनी थी लेकिन टल गई। इसी सप्ताह बैठक कराएंगे। उनका कहना है कि जांच एक तरह से पूरी हो चुकी है। अब इसमें कार्रवाई की बारी है।

वर्ष 1998 में फ्री होल्ड कराकर बेची गई
नजूल प्रभारी/अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि बात वर्ष 1998 से पहले की है। नगर निगम और कमिश्नरी से अक्षर विहार तालाब के पास नजूल भूमि का पट्टा आवंटित हुआ था। इसके बाद शासन से पट्टों को फ्री होल्ड कराकर बेचने की अनुमति मिली थी। उसी क्रम में तत्कालीन जिम्मेदारों ने अक्षर विहार का पट्टा फ्री होल्ड कराकर बेच दिया।

लेकिन इस पट्टे की आड़ में साजिश रचकर तालाब की भूमि भी फ्री होल्ड कराकर बेचने की बात सामने आई है। करीब 1000 वर्ग मीटर जमीन का मामला है। वर्ष 2016 में यह मामला उछला तब तत्कालीन एडीएम प्रशासन अरुण कुमार ने जांच की। जांच रिपोर्ट की फाइल अपर जिलाधिकारी वित्त कार्यालय में आई थी। इसके बाद फाइल दबा दी गई। एडीएम वित्त ने बताया कि शेरपाल, अनुराग मिश्रा और सुनील कुमार को नोटिस जारी किए गए है।

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