गोरखपुर : टेक्नोलॉजी के विकास के साथ भारतीय सेना में नारियों को अधिक अवसर : ब्रिगेडियर रावत

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अमृत विचार, गोरखपुर। राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कमांडर ब्रिगेडियर दीपेंद्र रावत ने कहा कि मातृभूमि की सुरक्षा के लिए महिलाओं की भागीदारी संतोषप्रद रूप से आगे बढ़ रही है। टेक्नोलॉजी के विकास के साथ महिलाओं के लिए भारतीय सेना में अधिक अवसर सृजित हो रहे हैं। देश की रक्षा के लिए लड़ना सौभाग्य की …

अमृत विचार, गोरखपुर। राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कमांडर ब्रिगेडियर दीपेंद्र रावत ने कहा कि मातृभूमि की सुरक्षा के लिए महिलाओं की भागीदारी संतोषप्रद रूप से आगे बढ़ रही है। टेक्नोलॉजी के विकास के साथ महिलाओं के लिए भारतीय सेना में अधिक अवसर सृजित हो रहे हैं। देश की रक्षा के लिए लड़ना सौभाग्य की बात है, चाहे यह अवसर पुरुष को मिले या महिला को।

ब्रिगेडियर रावत शुक्रवार अपराह्न महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, आरोग्यधाम बालापार गोरखपुर के प्रथम स्थापना दिवस (28 अगस्त) के उपलक्ष्य में ‘भारतीय सेना में नारी’ विषय पर बतौर मुख्य वक्ता अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने बताया कि सेना में महिलाओं की भागीदारी 1888 में नर्सों की भूमिका के रूप में शुरू हुई थी। पर महिलाओं को फौज में लाने की पहली व्यवस्थित पहल नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने की थी।

आजाद हिंद फौज में उन्होंने अलग से महिला बटालियन स्थापित कर यह सिद्ध किया था कि औरतें भी सेना में आ सकती हैं। ब्रिगेडियर रावत ने बताया कि भारतीय सेना में 1992 से महिलाओं को कमीशन मिलना शुरू हुआ और 2019 के बाद सेना के सभी अंगों में उनके प्रवेश की अनुमति मिली। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना महिलाओं के लिए भी एक बेहतरीन करियर का विकल्प है।

यहां कम उम्र में क्लास वन ऑफिसर बनने से लेकर प्रमोशन, जॉब सेटिस्फेक्शन के अलावा सबसे बड़ा आत्मीय सुख मातृभूमि की सुरक्षा में खुद के लगे होने का है। उन्होंने महिलाओं के लिए सेना में भर्ती की प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी और कहा कि लैंगिक आधार पर कोई रियायत चाहने की बजाय महिलाओं के मन में देश की सुरक्षा के लिए खुद का श्रेष्ठ देने का भाव होना चाहिए।

व्याख्यानमाला की विशिष्ट वक्ता भारतीय वायुसेना की सेवानिवृत्त स्क्वाड्रन लीडर श्रीमती राखी अग्रवाल ने कहा कि शारीरिक बनावट के आधार पर ऐसा माना जाता था कि महिलाएं सेना के लिए सक्षम नहीं हैं। लेकिन, शारीरिक शक्ति से अधिक महत्वपूर्ण है मानसिक शक्ति व दृढ़ इच्छाशक्ति। हर क्षेत्र में लड़कियों ने यह साबित कर दिखाया है कि वह सबकुछ कर सकती हैं और सेना भी इसमें शामिल है।

लड़कियां स्वयंसिद्धा हो चुकी हैं और उनके मन में भी अपने देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की भावना है। श्रीमती अग्रवाल ने कहा कि महिलाओं को लेकर धारणा धीरे-धीरे बदल रही है और आज के दौर में वह फाइटर पायलट तक बन रही हैं।

महिलाओं के लिए खुद को साबित करने का सेना एक शानदार विकल्प है। उन्होंने महिलाओं का आह्वान किया कि वह पुरुषों की तुलना में खुद को किसी भी तरह कमजोर न समझें। लैंगिक समानता के अनुसार उन्हें अपना अधिकार चाहिए तो इसके लिए उन्हें खुद को मजबूती से हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना होगा।

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