मुरादाबाद : मैडम! शादी नहीं मैं पढ़ लिखकर आत्मनिर्भर बनना चाहती हूं
मुरादाबाद,अमृत विचार। मैडम! मैं पढ़ लिखकर कुछ करना चाहती हूं। लेकिन, मेरे परिवार वाले इस बात को नहीं समझ रहे हैं। सभी मेरी शादी की जिद पाले बैठे हैं। अभी मैंने हाईस्कूल पास किया है। मुझे यहां नहीं रहना, अपने साथ लेकर चलो। यह गुहार है क्षेत्र के उस बेचारी की जिसकी शादी कराने में …
मुरादाबाद,अमृत विचार। मैडम! मैं पढ़ लिखकर कुछ करना चाहती हूं। लेकिन, मेरे परिवार वाले इस बात को नहीं समझ रहे हैं। सभी मेरी शादी की जिद पाले बैठे हैं। अभी मैंने हाईस्कूल पास किया है। मुझे यहां नहीं रहना, अपने साथ लेकर चलो। यह गुहार है क्षेत्र के उस बेचारी की जिसकी शादी कराने में घर वाले जुटे हैं। बाल विवाह रुकवाने पहुंची महिला सिपाही व चाइल्ड लाइन की सदस्य से किशोरी ने गुहार लगाकर टीम की सदस्यों को धर्मसंकट में डाल दिया।
- ठाकुरद्वारा के गांव में बाल विवाह की सूचना पर पहुंची टीम के सामने किशोरी ने लगाई गुहार
- प्रमाणपत्रों की जांच में 17 साल की निकली किशोरी की उम्र, सीडब्ल्यूसी ने वन स्टॉप सेंटर भेजा
मामला गुरुवार देर शाम का है। जब फोन पर ठाकुरद्वारा ब्लाक के गांव में पिता द्वारा नाबालिग बेटी की शादी कराए जाने की सूचना मिली थी। तो एएसटीयू, सीडब्ल्यूसी,चाइल्ड लाइन की टीम, पुलिस संग विवाह रुकवा दिया। प्रमाणपत्रों की जांच में टीम ने पाया कि लड़की इसी वर्ष ही 17 साल की हुई है।
टीम ने परिजनों से लड़की के बालिग होने पर विवाह कराने की बात कही लेकिन, परिजन इसको लेकर राजी नहीं हुए। ऐसे में टीम और परिजनों के बीच काफी नोकझोंक भी हुई। इस पर लड़की की गुहार के बाद मजबूरन टीम नाबालिग लड़की को रेस्क्यू करके ले आई और फिर चाइल्ड लाइन भेज दिया। शुक्रवार को नाबालिग को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया, जहां से किशोरी को वन स्टॉप सेंटर भेज दिया।
हर प्रयास यहां हो रहा विफल
चाइल्ड लाइन प्रभारी श्रद्धा शर्मा का कहना है कि बालिका विवाह रोकने के लिए जागरूकता अभियान, शिक्षा, स्वरोजगार, कानूनी कार्रवाई आदि की व्यवस्था की गई है। लेकिन, यह कुप्रथा रुक नहीं पा रही। खुद विभाग भी मानता है कि गुपचुप ढंग से बालिकाओं के विवाह कर दिए जाते हैं। कई मामलों की जांच भी चल रही हैं।
ये है अधिनियम
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत बाल विवाह करने वाले वर-वधु के माता-पिता, सगे संबंधी, बराती यहां तक की विवाह कराने वाले पुरोहित पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इस अधिनियम का उल्लंघन करने पर दो साल तक के कठोर कारावास या एक लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
ठाकुरद्वारा क्षेत्र के गांव में बाल विवाह रुकवाया गया। ऐसे में लड़की को डर था कि टीम के जाने के बाद परिजन उसका विवाह करा देंगे। ऐसे में बालिका साथ आ गई। शुक्रवार को नाबालिग को सीडब्ल्यूसी के पेश किया गया, जहां से किशोरी को वन स्टॉप सेंटर भेज दिया। – जया, संरक्षण अधिकारी, बाल कल्याण समिति
