आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर फहराए थे खुशी में तिरंगे, अब कर रहे उल्लंघन
अमृत विचार, लखनऊ। आजाद हिंदुस्तान में पहली बार हर नागरिक के हाथ में तिरंगा आया। पहली बार हर घर तिरंगा फहरा। चार पहिया और दुपहिया वाहन तो छोड़िये रिक्शा चलाने वाले ने भी अपने हैंडिल पर तिरंगा लगाया। आजादी की 75वीं सालगिरह पर सरकार ने हर नागरिक को यह मौका दिया था कि वह अपनी …
अमृत विचार, लखनऊ। आजाद हिंदुस्तान में पहली बार हर नागरिक के हाथ में तिरंगा आया। पहली बार हर घर तिरंगा फहरा। चार पहिया और दुपहिया वाहन तो छोड़िये रिक्शा चलाने वाले ने भी अपने हैंडिल पर तिरंगा लगाया। आजादी की 75वीं सालगिरह पर सरकार ने हर नागरिक को यह मौका दिया था कि वह अपनी आजादी पर इतराए। जिस तिरंगे को वह लालकिला, लोकसभा, विधानसभा और अदालतों की प्राचीरों पर देखता रहा है उसे अपने घर की छत और झोपड़ी तक ले आये।
सरकार ने 11 से 17 अगस्त तक हर घर पर तिरंगा लगाने की अनुमति दी। नियमानुसार तो 18 अगस्त की सुबह पूरे सम्मान के साथ तिरंगे उतार लिए जाने चाहिए पर बारिश में लगातार भीगकर तमाम जगहों पर तिरंगे बेरंग हो रहे हैं। तेज हवाओं से कई जगह पर लगे तिरंगे फट गए हैं। कई जगह ऐसे तिरंगे लगे हैं कि उनके धागे खुल रहे हैं। कई जगहों पर तिरंगे झुके हुए हैं तो कई स्थानों पर डंडे के शीर्ष से कुछ फुट नीचे तिरंगा लहरा रहे हैं।
आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान गली, मोहल्लों और चौराहों पर तिरंगे ऐसे लहरा रहे हैं, जैसे राजनीतिक दलों के झंडे। जिम्मेदारों को इस पर मंथन करना चाहिए। इससे पहले कि हमारी राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक तिरंगा इधर-उधर गिरने को मजबूर हो उसे सम्मान के साथ उतारकर रख देना चाहिए। ताकि आजादी के अगले उत्सव में इसे हम फिर खुले गगन में फहरा सकें।

राष्ट्रीय ध्वज संहिता
राष्ट्रीय ध्वज संहिता-2002 देश में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग, प्रदर्शन और फहराने को नियंत्रित करता है। यह 26 जनवरी, 2002 को लागू हुआ, और इससे पहले राष्ट्रीय ध्वज से संबंधित गतिविधियां प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग की रोकथाम) अधिनियम, 1950 और राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के प्रावधानों द्वारा नियंत्रित है। संहिता यह निर्देश देती है कि निजी, सार्वजनिक और सरकारी संस्थानों को राष्ट्रीय ध्वज को कैसे प्रदर्शित करना चाहिए।

राष्ट्रीय ध्वज फहराने के नियम
- तिरंगा सम्मान की स्थिति में होना चाहिए और स्पष्ट रूप से रखा जाना चाहिए।
- क्षतिग्रस्त या अस्त-व्यस्त ध्वज को कभी भी फहरा नहीं सकते।
- तिरंगे को कभी भी उल्टा नहीं दिखाना चाहिए, अर्थात भगवा पट्टी कभी भी नीचे नहीं होनी चाहिए।
- राष्ट्रीय ध्वज को किसी भी व्यक्ति या वस्तु की सलामी में नहीं डुबाना चाहिए।
- राष्ट्रीय ध्वज के साथ किसी भी अन्य ध्वज या बंटिंग को ऊपर या ऊपर या बगल में नहीं रखा जाना चाहिए।
- ध्वज के मस्तूल पर या उसके ऊपर फूल, माला या प्रतीक सहित कोई भी वस्तु नहीं रखी जानी चाहिए।
- राष्ट्रीय ध्वज का उपयोग उत्सव या किसी अन्य तरीके से सजावट के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
- राष्ट्रीय ध्वज को किसी भी परिस्थिति या स्थिति में पानी में जमीन या फर्श या पगडंडी को नहीं छूना चाहिए।
तीन साल की सजा व जुर्माने का प्रावधान
राष्ट्रीय ध्वज के अपमान पर भारतीय ध्वज आचार संहिता-2002 व राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम-1971 की धारा-2 के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें 3 वर्ष की सजा व जुर्माने का प्रावधान है या फिर दोनों ही हो सकते हैं।
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