अमृत विचार की खबर का असर: आखिर देश के 400 वैज्ञानिकों को वेतन की जगी उम्मीद
कन्नौज। आखिरकार देश भर के 200 कृषि विज्ञान केंद्रों में कार्यरत करीब 400 कृषि मौसम वैज्ञानिकों व कृषि मौसम प्रेक्षकों को वेतन मिलने की उम्मीद जगी। यह सभी गुजरे करीब 14 महीने से बिना वेतन के ही किसी तरह से गुजारा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के पोर्टल पर 150 से अधिक बार अलग-अलग केंद्रों के …
कन्नौज। आखिरकार देश भर के 200 कृषि विज्ञान केंद्रों में कार्यरत करीब 400 कृषि मौसम वैज्ञानिकों व कृषि मौसम प्रेक्षकों को वेतन मिलने की उम्मीद जगी। यह सभी गुजरे करीब 14 महीने से बिना वेतन के ही किसी तरह से गुजारा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के पोर्टल पर 150 से अधिक बार अलग-अलग केंद्रों के वैज्ञानिकों द्वारा गुहार लगाई गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इस संदर्भ में अमृत विचार ने इसी वर्ष 29 मई के अंक में इस समस्या को प्रमुखता से उठाया तो इसकी गूंज दिल्ली में बैठे जिम्मेदारों तक पहुंची। इसका ही परिणाम है कि अब खाली पेट गुजारा कर रहे वैज्ञानिकों को वेतन दिए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न प्रांतों बिहार, झारखंड, केरल, हरियाणा, महाराष्ट्र आदि कई जिलों में करीब 200 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हैं। इनमें कृषि वैज्ञानिकों के अलावा करीब 200 कृषि मौसम वैज्ञानिक व 200 मौसम प्रेक्षकों की नियुक्ति 2018 में की गई थी। इन सभी को गुजरे करीब 14 महीनों से वेतन नहीं मिल सका है। ये किसी तरह से गुजारा कर रहे हैं।

सूत्रों की मानें तो आलम यह है कि रोजमर्रा के खर्चे तक मुश्किल से निकल रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर कुछ ने बताया कि उनका कई महीने का किराया, बिजली का बिल आदि तक बाकी है तो कुछ के लिए बच्चों की स्कूल की फीस दे पाना टेढ़ी खीर हो गया है। खास बात तो यह है कि देश भर में 530 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित किए जाने थे लेकिन इसमें से अभी 200 ही संचालित हैं।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 200 केंद्रों के करीब चार सौ वैज्ञानिकों के लिए जनवरी 2022 में 10 करोड़ और इसके बाद 28 अप्रैल को 31 करोड़ रुपया रिलीज किया लेकिन यह रकम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तक नहीं पहुंची जिसके माध्यम से भुगतान किया जाता है। इस मामले के जानकारी में आने पर अमृत विचार ने 29 मई 2022 के अंक में प्रथम पृष्ठ पर इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसकी गूंज दिल्ली में बैठे जिम्मेदारों तक पहुंची।
विश्वस्त सूत्रों ने जानकारी दी है कि इन वैज्ञानिकों को वेतन मिलने का रास्ता साफ होने की खबर है। इस संबंध में स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र के एक वैज्ञानिक ने जानकारी दी है कि वेतन निर्गत करने को लेकर आईआईटीएम, पुणे (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। मामले को लेकर शुक्रवार को फंड फ्लो का सिस्टम बनाने की प्रक्रिया बनाने के लिए गुजरे शुक्रवार को संबंधित विभाग से आए मेल में जेडबीएसएबी महाराष्ट्र (जीरो बैलेंस सब्सीडियरी एकाउंट बैंक ऑफ महाराष्ट्र) में खाते खोलने का आदेश दिया गया है। इसके तहत संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र के हेड के नाम से सोमवार तक खाते खोल दिए जाएंगे। उम्मीद है कि अगले माह तक सभी का वेतन निर्गत हो जाएगा।
करीब छह वैज्ञानिक छोड़ चुके हैं काम
सवा साल से वेतन न मिलने से परेशान होकर देश भर के कुछ कृषि विज्ञान केंद्रों में कार्यरत वैज्ञानिकों ने अपनी धारा ही बदल दी है। कन्नौज कृषि विज्ञान केंद्र के सूत्र बताते हैं कि करीब छह ऐसे वैज्ञानिक हैं जो परीक्षा देने के बाद अन्य सेवाओं में चले गए हैं।
अयोध्या के वीसी ने 14 को किया बेरोजगार
सूत्रों ने जानकारी दी है कि नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्यौगिकी विश्वविद्यालय अयोध्या के वीसी प्रो. विजेंद्र सिंह ने नवंबर 2021 में एक पत्र जारी कर अपने कार्यक्षेत्र के सात कृषि विज्ञान केंद्रों के सात वैज्ञानिकों व सात मौसम प्रेक्षकों को तब तक के लिए सेवा से अनियमित करने का आदेश दिया जब तक कि वेतन के लिए फंड नहीं आ जाता। इस पर सभी ने विभाग को इस संबंध में पत्र लिखा तो आईसीएआर की तरफ से जारी पत्र में कहा गया कि यह सरकारी योजना है जिसे बंद नहीं किया जा सकता। इसके बाद भी वीसी ने मनमाने ढंग से 14 वैज्ञानिकों को बेरोजगार कर दिया।
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