सेक्स से पहले पार्टनर का पैन और आधार देखना जरूरी नहीं, जानिए दिल्ली HC ने ऐसा क्यों कहा
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने दस्तावेज़ों में तीन अलग-अलग जन्मतिथि वाली कथित नाबालिग पार्टनर से रेप के आरोपी को हाल ही में ज़मानत दी थी। कोर्ट ने कहा, सहमति से सेक्स से पहले पार्टनर का आधार या पैन देखना…या स्कूल रिकॉर्ड से उसकी जन्मतिथि को वेरिफाई करना जरूरी नहीं है। दरअसल, आधार में लड़की …
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने दस्तावेज़ों में तीन अलग-अलग जन्मतिथि वाली कथित नाबालिग पार्टनर से रेप के आरोपी को हाल ही में ज़मानत दी थी। कोर्ट ने कहा, सहमति से सेक्स से पहले पार्टनर का आधार या पैन देखना…या स्कूल रिकॉर्ड से उसकी जन्मतिथि को वेरिफाई करना जरूरी नहीं है। दरअसल, आधार में लड़की की जन्मतिथि 1998 जबकि पैन में 2004 है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि सहमति से संबंध बनाते समय किसी को पार्टनर का डेट ऑफ बर्थ चेक करने के लिए आधार और पैन कार्ड देखने की जरूरत नहीं होती है। कोर्ट ने पुलिस प्रमुख को इस बात की भी जांच करने को कहा कि क्या पीड़ित महिला आदतन अपराधी है, जिसने रेप का केस दर्ज कराकर पैसों की उगाही की। कोर्ट ने यह बात संभावित हनीट्रैप केस में एक शख्स को जमानत देते हुए कही।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने दावा किया था कि जब उसे सेक्स के लिए सहमत किया गया तब वह नाबालिग थी और फिर आरोपी ने धमकी देकर उसका रेप किया।
केस की सुनवाई के दौरान पिछले सप्ताह जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि एक व्यक्ति जो किसी के साथ सहमति से शारीरिक संबंध में है, उसे डेट ऑफ बर्थ जांच करने की जरूरत नहीं। संबंध बनाने से पहले उसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या स्कूल रिकॉर्ड से डेट ऑफ बर्थ जांचने की आवश्यकता नहीं है।
कोर्ट ने पाया कि महिला के बयान में कई तरह के विरोधाभास हैं और उसे एक साल में आरोपी के अकाउंट से 50 लाख रुपए प्राप्त हुए हैं। आखिरी पेमेंट एफआईआर से ठीक एक सप्ताह पहले किया गया था। लड़की ने शख्स के खिलाफ पॉक्सो ऐक्ट के तहत केस दर्ज कराया।
जज ने कोर्ट के पुराने आदेश के हवाले से यह भी कहा कि ऐसे केस बढ़ रहे हैं जहां मासूम लोगों को हनीट्रैप में फंसाया जाता है और बड़ी रकम वसूल कर ली जाती है।
जज ने कहा कि इस केस में मेरा विचार है कि इस केस में जितना दिखा उससे अधिक है। प्रथम दृष्टया मेरा विचार है कि यह भी ऐसी ही घटना है। जज ने पुलिस कमिश्नर को विस्तृत जांच का आदेश दिया।
आरोपी शख्स की ओर से पेश हुए वकील अमित चड्ढा ने कहा कि महिला के तीन डेट ऑफ बर्थ हैं। आधार के मुताबिक जन्म 1 जनवरी 1998 को हुआ, लेकिन पैन कार्ड में 2004 है। जब पुलिस ने वेरिफाई किया तो पाया कि डेट ऑफ बर्थ जून 2005 है।
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