कानपुर: वार्षिक प्लान से गोविंदनगर फ्लाईओवर आउट, टू लेन का 12 सौ मीटर लंबा फ्लाईओवर बनाने की थी योजना

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

कानपुर। गोविंद नगर में जाम से निजात के लिए प्रस्तावित 12 सौ मीटर लंबे टू लेन के फ्लाईओवर निर्माण की योजना की फाइल फिलहाल आलमारी में बंद हो गई। पीडब्ल्यूडी द्वारा जारी की गई ओवरब्रिज, फ्लाईओवर और पुलों के वार्षिक प्लान में इस प्रोजेक्ट नहीं रखा गया है। इतना ही नहीं चकेरी और दादानगर क्रासिंग …

कानपुर। गोविंद नगर में जाम से निजात के लिए प्रस्तावित 12 सौ मीटर लंबे टू लेन के फ्लाईओवर निर्माण की योजना की फाइल फिलहाल आलमारी में बंद हो गई। पीडब्ल्यूडी द्वारा जारी की गई ओवरब्रिज, फ्लाईओवर और पुलों के वार्षिक प्लान में इस प्रोजेक्ट नहीं रखा गया है। इतना ही नहीं चकेरी और दादानगर क्रासिंग पर प्रस्तावित ओवरब्रिज को छोड़कर कोई और प्रोजेक्ट कानपुर को इस साल नहीं मिलेगा।

गोविंद नगर में जाम बड़ी समस्या है। गोविंदपुरी पुल के समानांतर पुल तो बन गया, लेकिन इसका कोई खास लाभ नहीं मिलता है क्योंकि नया पुल नंदलाल चौराहा के पहले ही उतार दिया गया। अगर चौराहा पार तक पुल बनाया जाता तो यह समस्या दूर हो जाती। अभी साकेत नगर की ओर से आने वाले लोग पहले नंदलाल चौराहा पर फंसते हैं। इसके बाद वे चावला चौराहा पार करते हैं फिर पुल पर चढ़ते हैं और फजलगंज आते हैं।

दक्षिण के लोगों के लिए गोविंदनगर- फजलगंज मार्ग ही मुख्य मार्ग है उत्तर की ओर आने के लिए। प्रतिदिन इस इस मार्ग से चार से पांच लाख लोग दक्षिण क्षेत्र से सिविल लाइंस, गुमटी आदि क्षेत्रों को आते हैं। उनकी समस्या के समाधान के लिए विधायक सुरेंद्र मैथानी ने सेतु निर्माण निगम को प्रस्ताव दिया था। सेतु निगम ने सर्वे किया और फोर लेन पुल बनाने के लिए सड़क को उपयुक्त पाया।

तय किया गया कि पराग डेयरी से पुल शुरू होकर नंदलाल चौराहा होते हुए चावल मार्केट चौराहा पार कर इसे वर्तमान नया पुल के पास उतारा जाएगा। यह पुल ठीक मुरे कंपनी पुल और शिव नारायण टंडन पुल जैसा ही था।

मालरोड की तरफ से जाने वाले लोग मुरे कंपनी पुल से उतरते हैं और करीब सौ मीटर दूर जाकर शिव नारायण टंडन पुल पर चढ़ जाते हैं। ऐसे में वहां जाम नहीं लगता है। ठकी इसी तरह गोविंद नगर में भी जाम खत्म हो जाता, लेकिन अब यह प्रोजेक्ट फिलहाल मूर्त रूप नहीं लेगा। अब अगली वार्षिक योजना बनने तक इंतजार करना होगा।

इन मोहल्लों के लोगों को होता लाभ

बर्रा, कर्रही, दबौली, गुजैनी, साकेत नगर, निराला नगर, खाड़ेपुर, उस्मानपुर, केशवनगर, बर्रा, विश्व बैंक बर्रा, पशुपति नगर के साथ ही हेमंत विहार, घाटमपुर क्षेत्र की ओर से आने वाले लोग इसी रास्ते से कलेक्ट्रेट, मालरोड, पुलिस आफिस, कचहरी, हैलट अस्पताल, कार्डियोलॉजी आदि अस्पतालों तक आते हैं। करीब 10 लाख से अधिक आबादी को इसका लाभ मिलता।

पुल इस तरह बनना था

  • लंबाई: 12 सौ मीटर
  • चौड़ाई: 02
  • लागत: लगभग 126 करोड़ रुपये
  • यूटिलिटी शिफ्टिंग : 30 करोड़ रुपये

प्रोजेक्ट को वार्षिक प्लान में जगह नहीं मिल पायी। कोशिश होगी कि अगली बार का प्लान जब बने तो उसमें इसे शामिल कर लिया जाए।– राकेश सिंह, संयुक्त् प्रबंध निदेशक सेतु निगम

यह भी पढ़ें-कानपुर: उन्नाव प्रशासन जारी करेगा रिंग रोड के लिए अधिसूचना

संबंधित समाचार