समदा झील सौंदर्यीकरण परियोजना: प्राधिकरण ने सुनियोजित ढंग से खोद डाली घोटाले की नींव
अयोध्या। शहरी क्षेत्र में भू-माफिया से गठजोड़ के सहारे काली कमाई करने वाले अयोध्या विकास प्राधिकरण का अभी दिल नहीं भरा है, प्राधिकरण समदा झील सौन्दर्यीकरण पक्षी विहार परियोजना में भी हाथ की सफाई दिखाने से नहीं चूका। परियोजना शुरू होने से पहले ही प्राधिकरण ने सुनियोजित ढंग से यहां घोटाले की नींव खोद डाली। …
अयोध्या। शहरी क्षेत्र में भू-माफिया से गठजोड़ के सहारे काली कमाई करने वाले अयोध्या विकास प्राधिकरण का अभी दिल नहीं भरा है, प्राधिकरण समदा झील सौन्दर्यीकरण पक्षी विहार परियोजना में भी हाथ की सफाई दिखाने से नहीं चूका।
परियोजना शुरू होने से पहले ही प्राधिकरण ने सुनियोजित ढंग से यहां घोटाले की नींव खोद डाली। गजब यह रहा है करीब 9 करोड़ 66 लाख की इस परियोजना में कार्य आवंटन ही 7 करोड़ 30 लाख का किया गया है। शेष 2 करोड़ 36 लाख किस कार्य में खर्च होंगे यह बता पाने में प्राधिकरण के अफसर कन्नी काट रहे हैं।
यही कारण है कि कार्यदायी संस्था प्राधिकरण की ओर से सौंदर्यीकरण कार्य के तीन माह बीत जाने के बाद भी कार्यस्थल पर लागत, समय अवधि आदि का बोर्ड तक नहीं लगाया गया है, जबकि निर्माण नियमों के तहत कार्य शुरू होने से पूर्व कार्यदायी संस्था को बोर्ड लगाना चाहिए।
इस बाबत प्राधिकरण के अवर अभियंता प्रमोद शर्मा खुद कहते हैं बोर्ड लगाया जाना चाहिए, यह नियमों के तहत आता है। जून में शुरू हुई इस परियोजना की अवधि तीन महीने अगस्त तक थी, लेकिन सितम्बर शुरू होने के बाद भी अभी तक मात्र 80 प्रतिशत कार्य पूरा हुआ है।
अयोध्या रिंग रोड को छूती हुई सोहावल के कोला गांव की समदा झील को अधिग्रहण कर लगभग 67 हेक्टेयर भूमि को पक्षी विहार के रूप में विकसित करने की परियोजना शुरू की गयी है। परियोजना के दौरान ही खुदाई की मिट्टी को लेकर सवाल उठे थे, लेकिन प्राधिकरण ने अनसुना कर दिया।
आसपास के लोगों ने प्राधिकरण पर झील और खेतों से मिट्टी खोद दूसरी जगह भेजने का आरोप लगाया था। आसपास के चार गांव से घिरी इस झील के सौंदर्यीकरण में बड़ी-बड़ी लगभग 25 मशीनें काम के लिए लगाई गई हैं।
इस परियोजना का सबसे गजब हाल यह है कि टोटल मिट्टी के काम की कुल लागत कितनी है इसे लेकर ठेकेदार और अवर अभियंता दोनों के बयानों में बड़ा विरोधाभास है। ठेकेदार राजकुमार तिवारी ने बताया उन्हें करीब 5 करोड़ का काम मिला है, जबकि प्राधिकरण के जेई प्रमोद शर्मा 7 करोड़ 43 लाख के कार्य की बात करते हैं। इस परियोजना की कुल लागत 9 करोड़ 66 लाख है।
इसी घालमेल के चलते प्राधिकरण द्वारा 80 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद भी कार्य स्थल पर लागत समय अवधि आदि से सम्बंधित एक बोर्ड तक नही लगाया। अलबत्ता समदा से निकली मिट्टी को डम्परों के माध्यम से बाहर भेजने की शिकायतें लगातार आ रही हैं।
इस बारे में जब कुछ दिन पहले प्राधिकरण उपाध्यक्ष विशाल सिंह से पूछा गया था तब उन्होंने साईं कुटिया के पास स्थित मीर बाकी समाधि स्थल पर मिट्टी जाने की बात स्वीकार की थी। उसके बाद मिट्टी लगातार कहां भेजी जा रही है कोई जवाब नहीं दिया।
समदा से बाहर गई मिट्टी का हिसाब ही नहीं
अब कितनी मिट्टी समदा से बाहर भेजी गई इसका लेखा जोखा प्राधिकरण के पास नहीं है। झील के सौन्दर्यीकरण के साथ बांध का काम भी चल रहा है, जहां 30 मीटर उंचाई के लिए मिट्टी डाली जानी है, लेकिन अभी वहां यह कार्य नहीं शुरू हुआ है।
परियोजना में बंधे पर वन विभाग को पौधरोपण भी कराना शामिल है, लेकिन प्राधिकरण की ढिलाई के चलते वह अपना काम नहीं शुरू कर सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तरह से मशीनों के जरिए मिट्टी निकालने और सौन्दर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है वह परियोजना में बड़े खेल की ओर इशारा करता है।
10 करोड़ की परियोजना का काम 100 रुपये के स्टांप पर
अयोध्या विकास प्राधिकरण परियोजनाओं के नाम पर किस हद तक जा सकता है यह परियोजना इसका ज्वलंत उदाहरण है। करीब दस करोड़ की इस परियोजना का काम टेंडर के जरिए नहीं बल्कि सौ रुपए के स्टांप पर हुए अनुबंध से कराया जा रहा है। इस परियोजना का प्राधिकरण को नियमों के तहत टेंडर निकलना चाहिए था। यही कारण है कि बिना टेंडर निकाले मई में यहां आनन – फानन में भूमि – पूजन कर काम शुरू कर दिया गया।
इसके पीछे मोटी रकम में हाथ की सफाई तो है ही साथ ही जीएसटी चुराना भी बताया जा रहा है। टेंडर निकाला जाता तो नियमत: ठेकेदार को संपूर्ण लागत के तहत जीएसटी अदा करनी होती, लेकिन काकस ने स्टांप के सहारे परियोजना शुरू करा सरकार को भी लाखों का चूना लगा दिया है।
9 करोड़ 66 लाख की इस परियोजना का 12 फीसद जीएसटी अब नगद में बदल कर अफसरों की जेब में चला जायेगा जो लाखों में बनता है। दबी जुबान से अवर अभियंता भी इस लोचे को स्वीकारते हैं, लेकिन खुल कर कहने से बच रहे हैं।
वर्जन –
परियोजना की कुल लागत 9 करोड़ 66 लाख है। जिसमें 7.50 करोड़ का कार्य आवंटन किया गया है। टेंडर के बजाए अनुबंध के आधार पर कार्य हो रहा है। इसमें कोई नियमों का उल्लंघन नहीं है।- अजय कुमार, एक्सईएन, अयोध्या विकास प्राधिकरण
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