कृषि क्षेत्र में ‘कारपोरेट’ को हरी झंडी, मंडियों में छाएगा सन्नाटा
नई दिल्ली, ज्ञानेंद्र सिंह। किसानों को राहत देने के नाम पर मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र में प्रवेश के लिए ’कारपोरेट कंपनियों’ को हरी झंडी दिखा दी है। इसका सीधा लाभ किसानों को कितना मिलेगा यह तो समय बताएगा। मगर देश की सैकड़ों कृषि उत्पादन मंडियों में अब और सन्नाटा पसारना तय है। उत्तर प्रदेश में …
नई दिल्ली, ज्ञानेंद्र सिंह। किसानों को राहत देने के नाम पर मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र में प्रवेश के लिए ’कारपोरेट कंपनियों’ को हरी झंडी दिखा दी है। इसका सीधा लाभ किसानों को कितना मिलेगा यह तो समय बताएगा। मगर देश की सैकड़ों कृषि उत्पादन मंडियों में अब और सन्नाटा पसारना तय है।
उत्तर प्रदेश में भी 220 कृषि उत्पादन मंडी परिसर हैं। किसानों को उचित मूल्य दिलाने, कृषि उत्पादन का लेखा-जोखा एवं नियंत्रण बनाए रखने के इरादे से देशभर में कृषि मंडियों का गठन किया गया था। इससे पूर्व किसानों से माल खरीद कर व्यापारी भंडारण करते थे और आफ सीजन में मुंह मांगे दामों पर बेचते थे।
इस पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम को सख्त किया गया था ताकि किसानों की मजबूरी का फायदा व्यापारी ना उठा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में किसानों को राहत देने के नाम पर उक्त दोनों व्यवस्थाओं को शिथिल कर दिया गया है और अब कारपोरटे कंपनियां गांव में जाकर किसानों की फसल खरीद सकती हैं। किसानों के तमाम उत्पाद जैसे अनाज, दलहन, तिलहन व आलू- प्याज आदि आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिए गए हैं।
इतना ही नहीं अब कृषि उत्पाद का निजी क्षेत्र में भंडारण भी हो सकता है और उस पर कोई भी सरकारी अंकुश नहीं रहेगा। अब देखना यह है कि जोर-शोर से शुरू की गई ‘ई-मंडी योजना’ का क्या हश्र होता है। जिसका मकसद अनाज एवं सब्जी मंडियों को ई-मंडी के दायरे में लाकर किसानों को उचित मूल्य दिलाना था। इस पर काफी काम भी हुआ था। लेकिन अब एक नए ‘राष्ट्रीय कृषि बाजार’ का जन्म होना तय है।
कृषि उत्पाद पर सरकारी अंकुश होगा समाप्त
मोदी सरकार का मानना है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से तमाम कृषि उत्पादों को बाहर करने एवं बड़ी कंपनियों को किसानों से सीधा सौदेबाजी करने का फैसला किसानों के हित में होगा। लेकिन मंडी समितियों के विशेषज्ञों का मानना है इससे कृषि उत्पाद पर सरकारी अंकुश समाप्त हो जाएगा फार्म संख्या 6, फार्म संख्या 5-क, एवं फार्म संख्या 9 की अनिवार्यता समाप्त होने से यह रिकॉर्ड नहीं रहेगा। किस राज्य में कितना कृषि उत्पाद बिका और किस राज्य में भेजा गया। जबकि वर्तमान में कृषि उत्पाद का व्यापार करने के लिए लाइसेंस प्रणाली है।
