बरेली: शहर में पानी के पाइप लीक होते रहेंगे पर ढूंढ़े नहीं मिलेंगे ठीक करने वाले
बरेली। अगर आप के मोहल्ले में पानी का पाइप लीकेज हो गया तो ठीक कराने के लिए कर्मचारियों को ढूंढ़ना मुश्किल होगा क्योंकि नगर निगम का जलकल विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। आबादी के हिसाब से पाइप लाइन का विस्तार हो गया लेकिन कर्मचारियों का मानक कई दशक पुराने हैं। कर्मचरी रिटायर्ड …
बरेली। अगर आप के मोहल्ले में पानी का पाइप लीकेज हो गया तो ठीक कराने के लिए कर्मचारियों को ढूंढ़ना मुश्किल होगा क्योंकि नगर निगम का जलकल विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। आबादी के हिसाब से पाइप लाइन का विस्तार हो गया लेकिन कर्मचारियों का मानक कई दशक पुराने हैं।
कर्मचरी रिटायर्ड होते गए और नई भर्ती नहीं हुई। नतीजतन, ठेका देकर जलकल जैसे-तैसे काम चला रहा है। यहां तक कि ठेकेदारों की मानीटरिंग करने के लिए सुपरवाइजर तक नहीं हैं। कर्मचारियों के लिहाज से नगर निगम का जलकल विभाग सबसे दयनीय स्थिति से गुजर रहा है।
कर्मचारियों की भारी कमी से शहर की पेयजल सप्लाई की व्यवस्था चरमरा गई है। करीब 10 लाख से ज्यादा आबादी को पेयजल सप्लाई और 659 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन की लीकेज ठीक करने के लिए एक भी सुपरवाइजर नहीं है। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो ढ़ाई दशक पहले मात्र चार लाख की आबादी पर पांच पाइप लाइन इंस्पेक्टर (जेई) और इतने ही सीवर पप इंसपेक्टर कार्यरत थे।
सीवर अधीक्षक और पंप अधीक्षक भी अपने काम की अलग-अलग मानीटरिंग करते थे। 14 सुपरवाइजर और 20 फिटर भी थे लेकिन अब आबादी भी बढ़ गई है लेकिन जलकल विभाग सुपरवाइजर विहीन है। नए निर्धारित मानक के हिसाब से 40 फिटर की जरूरत के सापेक्ष मात्र चार फिटर हैं।
प्रत्येक फिटर के साथ कम से तीन खलासी की जरूरत होती है लेकिन यहां केवल पांच खलासी विभाग में मौजूद हैं। अधिकांश सीवर और पेयजल सप्लाई पप ठेके पर चलते हैं लेकिन ठेकेदारों की मानीटरिंग करने के लिए कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी तैनात नहीं है। अभी पाईप लाइन के विस्तार का कार्य भी चल रहा है।
