IAC Vikrant : आ गया समंदर का सबसे बड़ा लड़ैया, देश को मिला पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत
कोच्चि। स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर IAC विक्रांत भारत के समुद्री इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और जटिल युद्धपोत है इसका नाम 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भारत के पहले एयरक्राफ्ट कैरियर के नाम पर रखा गया है, जो पूरी तरह से तैयार है। The new Naval Ensign unveiled by @PMOIndia Shri …
कोच्चि। स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर IAC विक्रांत भारत के समुद्री इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और जटिल युद्धपोत है इसका नाम 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भारत के पहले एयरक्राफ्ट कैरियर के नाम पर रखा गया है, जो पूरी तरह से तैयार है।
The new Naval Ensign unveiled by @PMOIndia Shri @narendramodi on #02Sep 22, during the glorious occasion of commissioning of #INSVikrant, first indigenously built Indian Aircraft Carrier & thus, an apt day for heralding the change of ensign.
Know all about the new Ensign ⬇️ pic.twitter.com/ZBEOj2B8sF
— SpokespersonNavy (@indiannavy) September 2, 2022
भारतीय नौसेना को दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर (IAC) मिला। IAC विक्रांत बस पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर ही नहीं, समंदर पर तैरता किला है।
INS Vikrant is an example of Government's thrust to making India's defence sector self-reliant. https://t.co/97GkAzZ3sk
— Narendra Modi (@narendramodi) September 2, 2022
आईएनएस विक्रांत का डिजाइन और निर्माण, सबकुछ भारत में ही किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी कोचीन शिपयार्ड पहुंचे। यहां मौजूद नौसेना के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। पीएम मोदी को नेवी की ओर से गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोचीन में नौसेना के नए निशान का अनावरण किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हम एक मुक्त, खुला, समावेशी इंडो-पैसिफिक में विश्वास रखते हैं। इस संबंध में हमारे प्रयास प्रधानमंत्री की दृष्टि ‘SAGAR’ यानी ‘सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन दा रीजन’ से निर्देशित है। आप सभी नौसेना की परंपराओं से अवगत हैं, ‘ओल्ड शिप्स नेवर डाई’। 1971 के युद्ध में अपनी शानदार भूमिका निभाने वाले विक्रांत का यह नया अवतार, ‘अमृत-काल’ की उपलब्धि के साथ-साथ हमारे स्वतंत्रता सेनानियों और बहादुर फौजियों को भी एक विनम्र श्रद्धांजलि है। ‘अमृतकाल’ के प्रारंभ में INS विक्रांत की कमीशनिंग अगले 25 वर्षों में राष्ट्र की सुरक्षा के हमारे मजबूत संकल्प को दर्शाती है। INS विक्रांत आकांक्षाओं और आत्मनिर्भर भारत का एक असाधारण प्रतीक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विक्रांत विशाल है, विराट है, विहंगम है। विक्रांत विशिष्ट है, विक्रांत विशेष भी है। विक्रांत केवल एक युद्धपोत नहीं है। ये 21वीं सदी के भारत के परिश्रम, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। केरल के समुद्री तट पर पूरा भारत एक नए भविष्य के सूर्योदय का साक्षी बन रहा है। INS विक्रांत पर हो रहा यह आयोजन, विश्व क्षितिज पर भारत के बुलंद होते हौसलों की हुंकार है। यदि लक्ष्य दुरन्त हैं, यात्राएं दिगंत हैं, समंदर और चुनौतियां अनंत हैं- तो भारत का उत्तर विक्रांत है। आजादी के अमृत महोत्सव का अतुलनीय अमृत है विक्रांत। आत्मनिर्भर होते भारत का अद्वितीय प्रतिबिंब है विक्रांत।
सेनाओं में किस तरह बदलाव आ रहा है उसका एक पक्ष मैं देश के सामने रखना चाहता हूं, विक्रांत जब हमारे समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उतरेगा, तो उस पर नौसेना की अनेक महिला सैनिक भी तैनात रहेंगी। समंदर की अथाह शक्ति के साथ असीम महिला शक्ति, ये नए भारत की बुलंद पहचान बन रही है।
आज 2 सितंबर, 2022 की ऐतिहासिक तारीख को, इतिहास बदलने वाला एक और काम हुआ है। आज भारत ने गुलामी के एक निशान, गुलामी के एक बोझ को अपने सीने से उतार दिया है। आज से भारतीय नौसेना को एक नया ध्वज मिला है। अब तक भारतीय नौसेना के ध्वज पर गुलामी की पहचान बनी हुई थी। लेकिन अब आज से छत्रपति शिवाजी से प्रेरित, नौसेना का नया ध्वज समंदर और आसमान में लहराएगा।
इस तरह के एयरक्राफ्ट कैरियर सिर्फ विकसित देश ही बनाते थे। आज भारत इस लीग में शामिल होकर विकसित राज्य की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है।
INS विक्रांत के हर भाग की अपनी एक खूबी है, एक ताकत है, अपनी एक विकासयात्रा भी है। ये स्वदेशी सामर्थ्य, स्वदेशी संसाधन और स्वदेशी कौशल का प्रतीक है। इसके एयरबेस में जो स्टील लगी है, वो स्टील भी स्वदेशी है। यह युद्धपोत से ज़्यादा तैरता हुआ एयरफ़ील्ड है, यह तैरता हुआ शहर है। इसमें जतनी बिजली पैदा होती है उससे 5,000 घरों को रौशन किया जा सकता है। इसका फ्लाइंग डेक भी दो फुटबॉल फ़ील्ड से बड़ा है। इसमें जितने तार इस्तेमाल हुए हैं वह कोचीन से काशी तक पहुंच सकते हैं।
भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि यह भारत के लिए गर्व का क्षण है कि उन्होंने एक स्वदेशी युद्धपोत का निर्माण किया। भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है और दिखाया है कि वह एक प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दुनिया को मजबूत भारत की जरूरत।
Shaping a Dream Building a Nation
Designed by #IndianNavy constructed by @cslcochin, a shining beacon of #AatmaNirbharBharat, #IACVikrant is all set to be commissioned into the #IndianNavy.#INSVikrant#LegendisBack@PMOIndia @DefenceMinIndia @shipmin_india @SpokespersonMoD pic.twitter.com/RVweCActMW
— SpokespersonNavy (@indiannavy) September 2, 2022
31 जनवरी 1997 को नेवी से INS विक्रांत को रिटायर कर दिया गया था। अब तकरीबन 25 साल बाद एक बार फिर से INS विक्रांत का पुनर्जन्म हो रहा है।
Indigenous Aircraft Carrier #IACVikrant the largest & most complex warship ever built in the maritime history of #India, named after her illustrious predecessor, India’s first Aircraft Carrier which played a vital role in the 1971 war is all set to be commissioned#INSVikrant pic.twitter.com/ADsSoIXUNr
— रक्षा मंत्री कार्यालय/ RMO India (@DefenceMinIndia) September 2, 2022
PM नरेंद्र मोदी कुछ ही देर में इसे इंडियन नेवी को सौंपेंगे। 1971 की जंग में INS विक्रांत ने अपने सीहॉक लड़ाकू विमानों से बांग्लादेश के चिटगांव, कॉक्स बाजार और खुलना में दुश्मन के ठिकानों को तबाह कर दिया था।
मैं आईएनएस विक्रांत के captain, और crew के भविष्य के प्रयासों में सफलता की कामना करता हूं। ईश्वर आपको हर परिस्थितियों में अजेय रखें। 'शं नो वरुणः' यानि ‘May the Lord of the Water, be auspicious unto us’ की कामना करता हूँ: रक्षा मंत्री
— रक्षा मंत्री कार्यालय/ RMO India (@DefenceMinIndia) September 2, 2022
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