लखनऊ: भरवारा में 50 हजार आबादी को नसीब नहीं सड़क, भरत-लक्ष्मण मिलाप की गवाह बनी थी यह जगह
लखनऊ। राजधानी के भरवारा इलाके में स्थित विज्ञान खंड में जनसमस्याओं की भरमार है। बताया जा रहा है कि यह इलाका करीब दो साल पहले नगर निगम में आया था। इस इलाके की अकेले यही पहचान नहीं है कि यह क्षेत्र राजधानी लखनऊ का एक हिस्सा है। स्थानीय लोगों की माने तो इस इलाके का …
लखनऊ। राजधानी के भरवारा इलाके में स्थित विज्ञान खंड में जनसमस्याओं की भरमार है। बताया जा रहा है कि यह इलाका करीब दो साल पहले नगर निगम में आया था। इस इलाके की अकेले यही पहचान नहीं है कि यह क्षेत्र राजधानी लखनऊ का एक हिस्सा है। स्थानीय लोगों की माने तो इस इलाके का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है।
यहां भरत अपने भाई लक्ष्मण से मिलने आये थे,इस जगह पर दोनों भाइयों ने मिलकर एक-एक पीपल का पेंड भी लगाया था, विज्ञान खंड के इस क्षेत्र में पीपल के दो पेंड़ लगे हुये है,बताया यह जा रहा है कि एक पीपल का पेंड़ लक्ष्मण जी ने लगाया था,तो दूसरा पेंड़ भरत जी ने लगाया था । जनश्रुति की माने तो लक्ष्मण व भरत दोनों भाइयों की निशानी आज भी यहां मौजूद है।
कहा तो यहां तक जाता है कि इसी वजह से इस इलाके का नाम भरवारा पड़ा है। प्रदेश सरकार के मंत्री व विधायक भी इस जगह पर पहुंच कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं,साथ ही लोगों की सड़क,नाली व बिजली जैसी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने का वादा भी कर चुके हैं,लेकिन आज तक यह वादा पूरा नहीं हुआ। करीब 50 हजार से अधिक आबादी वाले इस इलाके में भारी तादात में जनसमस्याओं का अम्बार है।
कई जगहों पर जल भराव के चलते बारिश के इस मौसम में संक्रामक बीमारीयां भी लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी है। डेंगू जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में भी लोग आये हैं। लोगों की अस्था का केंद्र यह इलाक आज भी अपने बदहाली के दिन गिन रहा है। आरोप तो यहां तक है कि इस इलाके में बिजली का कनेक्शन लेने के लिए लोगों को सुविधा शुल्क भी देना पड़ता है।
यह भी पढ़ें-सीतापुर: आखिर कब मिलेगा सलेमपुर को रास्ता, गांव तक नहीं पहुंच पाती एम्बुलेंस
