Teachers’ Day 2022 : गुरु की महिमा से हर लक्ष्य की प्राप्ति संभव
मुरादाबाद, अमृत विचार। गुरु शब्द में पूरे ब्रह्मांड का मर्म समाया है। गुरु वह है जो माता पिता से भी अधिक महत्वपूर्ण भूमिका बच्चे का भविष्य गढ़ने में निभाता है। सच्चे गुरु की महिमा से जीवन के हर लक्ष्य की प्राप्ति तो संभव है तो परम ब्रह्म के दर्शन भी ही कराता है। इसलिए ऐसे …
मुरादाबाद, अमृत विचार। गुरु शब्द में पूरे ब्रह्मांड का मर्म समाया है। गुरु वह है जो माता पिता से भी अधिक महत्वपूर्ण भूमिका बच्चे का भविष्य गढ़ने में निभाता है। सच्चे गुरु की महिमा से जीवन के हर लक्ष्य की प्राप्ति तो संभव है तो परम ब्रह्म के दर्शन भी ही कराता है। इसलिए ऐसे गुरु को स्वयं गोविंद ने भी पहले वंदनीय माना है। क्योंकि गुरु ही बच्चे को तराश कर ऐसा आइना बनाता है जिसमें परिवार, समाज और देश की छवि प्रतिबिंबित होती है। ऐसे सच्चे गुरु हम सभी के वंदनीय हैं।
बेहतर सोच और कार्य से प्राथमिक विद्यालय टाहनायक के शिक्षक योगराज को मिल चुका है राज्य पुरस्कार
बाराबंकी जिले से 2016 में स्थानांतरित होकर मूंढापांडे ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय टाहनायक में प्रधानाध्यापक बनकर आए योगराज सिंह माहौल को पढ़ाई के अनुकूल न देख हैरत में पड़ गए। वहां का भौतिक परिवेश और शैक्षिक स्तर अत्यंत खराब था। जिससे व्यथित होकर उन्होंने ठान लिया कि इसमें सुधार कर नई ऊर्जा का संचार करना है। 2016 में इस स्कूल में केवल 67 बच्चों का नामांकन था और प्रधानाध्यापक कक्ष भी नहीं था। उन्होंने अपने वेतन के पैसे से प्रधानाध्यापक कक्ष बनवाया। स्कूल में बाउंड्री न होने से छात्रों की असुरक्षा को दूर करने के लिए ग्राम पंचायत के पदाधिकारियों से मिलकर सहयोग मांगा। इसके बाद बाउंड्रीवॉल, इंटरलॉकिंग, झूला और टाइल्स लग गया। प्रतिफल यह हुआ कि अब 140 छात्र यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बेहतर सोच से शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के सराहनीय कार्य के चलते वह प्रधानाध्यापक श्रेणी में 2019-20 में जिले से राज्य पुरस्कार के लिए चयनित हो चुके हैं। इस समय योगराज सिंह एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (गणित) एआरपी के रूप में कार्यरत हैं।
शिक्षा की रोशनी से फुटपाथ के बच्चों का भविष्य संवार रहीं शिल्पी
लाइनपार की शिल्पी शिक्षा को सेवाभाव मानती हैं। इस सोच को वह फुटपाथ पर घूमने वाले गरीब बच्चों को शिक्षित कर सार्थक कर रही हैं। उन्होंने जब पहली बार गरीब बच्चों को सड़क पर असहाय हाल में घूमते देखा तो उनके हालात को देख वह द्रवित हुईं। उम्मीद के साथ उन्होंने गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ाने का बीड़ा उठाया। कई बच्चे हिचके तो उन्होंने खिलौने देकर नजदीकी बढ़ाई। बच्चों की संख्या बढ़ने पर उन्होंने उम्मीद संस्था बनाकर बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद बनकर काम करने लगीं। शिल्पी से शिक्षा लेने अब 179 गरीब परिवार के बच्चे आ रहे हैं। आसपास के लोग भी उनके इस जज्बे की सराहना करते हैं। उनके द्वारा शिक्षित किए जा रहे बच्चे खेल प्रतियोगिताओं में भी शामिल हो रहे हैं। इस कार्य के लिए वह सम्मानित भी हो चुकी हैं।
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