मुरादाबाद : तीन माह बाद टूटी नेपाली दूतावास की नींद, एनजीओ के सुपुर्द की किशोरी
मुरादाबाद, अमृत विचार। निकाह के नाम पर पहले रामपुर फिर दिल्ली और अंत में मुरादाबाद में सिलसिलेवार दुष्कर्म की शिकार बनी 15 वर्षीय किशोरी तीन माह बाद नेपाली दूतावास के सुपुर्द कर दी गई। बाल कल्याण समिति ने पीड़िता को उस नेपाली एनजीओ ”किन” के सुपुर्द कर दिया, जो मानव तस्करी पर नजर रखती है। …
मुरादाबाद, अमृत विचार। निकाह के नाम पर पहले रामपुर फिर दिल्ली और अंत में मुरादाबाद में सिलसिलेवार दुष्कर्म की शिकार बनी 15 वर्षीय किशोरी तीन माह बाद नेपाली दूतावास के सुपुर्द कर दी गई। बाल कल्याण समिति ने पीड़िता को उस नेपाली एनजीओ ”किन” के सुपुर्द कर दिया, जो मानव तस्करी पर नजर रखती है। एनजीओ की मदद से पीड़िता को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
- वन स्टाप सेंटर में तीन महीने गुजारने के बाद मां-बाप के पास जाने को राजी हुई पीड़िता
- एनजीओ की मदद से दुष्कर्म पीड़िता को मां-बाप के सुपुर्द कराने में जुटा नेपाली दूतावास
सिविल लाइंस पुलिस ने छह जून को हरथला से 15 वर्षीय एक किशोरी को बदहवासी के हाल में बरामद किया। बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किशोरी ने चौंकाने वाला बयान दर्ज कराया। बताया कि एक माह में चार लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपियों में रामपुर के सगे दो भाइयों के अलावा दिल्ली का रहने वाला 50 वर्षीय असलम व मुरादाबाद के ऑटो चालक नाजिम का नाम शामिल है।
नाजिम फिलहाल जेल की हवा खा रहा है। अन्य तीन आरोपियों को सिविल लाइंस पुलिस अभी भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है। उधर पीड़िता को वन स्टाप सेंटर भेजने के बाद बाल कल्याण समिति ने नेपाली दूतावास से संपर्क किया। नेपाली किशोरी के साथ हुई दुष्कर्म की घटना का उल्लेख करते हुए पीड़िता का पुनर्वासन सुनिश्चित करने की कोशिश में जुटी। दूतावास ने तत्काल पहल का आश्वासन तो दिया, लेकिन इंतजार की घड़ियां लगातार बीतने लगी। तीन माह बाद सोमवार को दूतावास की पहल पर एक नेपाली एनजीओ के प्रतिनिधि मुरादाबाद पहुंचे।
बाल कल्याण समिति से संपर्क साधने के बाद उन्होंने नेपाली किशोरी की सुपुर्दगी सुनिश्वित करने की मांग की। प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व नवीन जोशी व लक्ष्मी विष्ट कर रहे थे। दूतावास की सहमति पर बाल कल्याण समिति ने पीड़िता को नेपाली एनजीओ के सुपुर्द कर दिया। एनजीओ व नेपाली दूतावास के अधिकारियों संग पीड़िता दिल्ली लौट गई। न्यायपीठ ने बताया कि नेपाली एनजीओ पीड़िता के परिजनों के संपर्क में है और किशोरी भी परिजनों के पास जाने को राजी हो गई है। ऐसे में उसे एनजीओर के सुपुर्द कर दिया गया।
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